नूरपुर का नूर : अकिल बक्शी ने हुनर से किया यूपीएससी में कमाल, सेवा के रास्ते अब विरासत की संभाल
नूरपुर का नूर : अकिल बक्शी ने हुनर से किया यूपीएससी में कमाल, सेवा के रास्ते अब विरासत की संभाल
विनोद भावुक। नूरपुर
कभी यूपीएससी की प्रतिष्ठित परीक्षा पास कर भारतीय रेल सेवा में नियुक्त हुए अकिल बक्शी, आज नूरपुर की जनता के बीच एक समर्पित समाजसेवी और नई पीढ़ी की प्रेरणा बन चुके हैं। वे सिर्फ़ एक पूर्व अधिकारी नहीं, बल्कि ईमानदारी, संवेदनशीलता और कर्मनिष्ठा का पर्याय हैं, जिन्होंने पिता की राजनीतिक विरासत को एक नए अंदाज़ में आगे बढ़ाया है।
अकिल बक्शी न सिर्फ़ अपने पिता की ईमानदार विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संदेश भी छोड़ रहे हैं कि सेवा सिर्फ़ पद से नहीं, दृष्टिकोण से होती है। लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाना और युवाओं के सपनों को उड़ान देना ही उनके लिए राजनीति है।
विरासत में मिली ईमानदारी की शिक्षा
अकिल बक्शी, नूरपुर के पूर्व विधायक रणजीत बक्शी के सुपुत्र हैं। रणजीत बक्शी एक ऐसे नेता रहे,
जिनकी स्पष्टवादिता और निष्ठा आज भी नूरपुर की पहचान है। डीए.वी. बागनी से शिक्षा की शुरुआत कर अकिल ने पाइनग्रोव कसौली और मॉडर्न संदीपनी स्कूल पठानकोट से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की।
राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला से स्नातक करते हुए उन्होंने हिमाचल विश्वविद्यालय में तीसरा स्थान हासिल किया। दिल्ली की आई.आई.एम.सी. से पत्रकारिता और जनसंचार में मास्टर्स किया और विश्वविद्यालय में द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
चार बार पास की UPSC परीक्षा
अकिल बक्शी ने युवावस्था में ही तय कर लिया था कि वे UPSC परीक्षा पास करेंगे। कमरे में बंद होकर, दिन-रात मेहनत की और परिणाम भी अभूतपूर्व रहा। अकिल ने चार बार UPSC क्लियर किया और अंततः 2012-13 में भारतीय रेल सेवा में उनका चयन हुआ।
सेवा काल में बनारस और कई शहरों में कार्य करते हुए उन्होंने प्रशासनिक दक्षता और मानवीय दृष्टिकोण दोनों का परिचय दिया। प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्हें लग रहा था कि असल में वे किसी दूसरे ही मिशन के लिए बने हैं।
कोरोना काल में समाजसेवा का संकल्प
पिता के निधन के कारण कोरोना महामारी के दौरान जब वे नूरपुर लौटे, तो उन्होंने अपने क्षेत्र की असल तस्वीर देखी। टूटे रास्ते, गंदगी, बेरोजगारी और बदहाल गाँव। यही पल था, जिसने उनमें सेवा का संकल्प जगाया।
उन्होंने अपने पैसे और प्रयास से नूरपुर की 50 पंचायतों में लाइब्रेरी खोलीं, 125 युवक मंडलों को स्पोर्ट्स किट्स दीं और 4 जिम स्थापित किए ताकि युवा फिटनेस और अनुशासन की ओर बढ़ें। उनके ये प्रयास रंग ला रहे हैं।
महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की पहल
अकिल बक्शी ने महिलाओं की आत्मनिर्भरता के लिए 150 महिला मंडलों को सिलाई मशीनें, 50 युवतियों को ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण और 24 युवतियों को टेलरिंग कोर्स करवाया है। वे 50 बेटियों की शिक्षा का खर्च खुद उठा रहे हैं।पिता की जयंती पर जसूर स्कूल के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देते हैं।
70 टॉयलेट और 50 घर बनवाकर उन्होंने बेसहारा परिवारों के जीवन में रोशनी भर दी है। महिला मंडलों को उन्होंने स्वरोजगार का रास्ता दिखाया। युवाओं की मांग पर बहादुर का तालाब (वासा पंचायत) में लाइटें और वोटिंग स्टॉल लगवाए, जिससे गांव के युवक मंडल की आय का साधन बना।
राजनीति में प्रवेश, जनसेवा का मिशन
एक दिन सुखार पंचायत के एक दुर्गम गांव की यात्रा में अकिल बक्शी ने देखा कि कैसे लोग चारपाई पर लादकर अस्पताल तक पहुँचाए जाते हैं। यही वह क्षण था, जब उनके भीतर राजनीति में आने का बीज अंकुरित हुआ।
उन्होंने खुद नाबार्ड टीम को बुलाकर सड़क निरीक्षण करवाया, लेकिन जब भ्रष्टाचार और उदासीनता देखी, तो उन्होंने तय किया कि अब बदलाव लाना ही असली सेवा है। आज वे नूरपुर के गांव-गांव में जनता के साथ खड़े हैं और अपनी कर्मनिष्ठा से एक नई राजनीति की संस्कृति गढ़ रहे हैं।
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