यूक्रेन के चेरनोबिल में हुआ न्यूक्लियर हादसा, मनाली के ढुंगरी गांव फैली ख़तरनाक रेडिएशन फैलने की अफवाह
यूक्रेन के चेरनोबिल में हुआ न्यूक्लियर हादसा, मनाली के ढुंगरी गांव फैली ख़तरनाक रेडिएशन फैलने की अफवाह
विनोद भावुक । कुल्लू घाटी
1986 के सदी के मौसम में मनाली के ढुंगरी गांव की पगडंडियों पर चलते हुए कैलिफ़ोर्निया के येती जुईस को एक व्यक्ति मिला, जो खुद को पुरोहित बताने लगा। उसने दावा किया कि 26 अप्रैल 1986 को यूक्रेन के चेरनोबिल न्यूक्लियर हादसे के बाद ऊपरी कुल्लू घाटी के ऊपर एक विशाल काली घटा छाई थी, जो रेडियोधर्मी थी और सीधे चेरनोबिल से आई थी।
उस दौर में, जब खबरें देर से पहुंचती थीं और पहाड़ों में अफ़वाहें आग की तरह फैलती थीं, यह बात सुनकर डर लगना स्वाभाविक था। हजारों मील दूर हुए चेरनोबिल न्यूक्लियर हादसे के ख़तरनाक रेडिएशन मनाली के गांव तक पहुँचने की इस अफवाह से दहशत का माहौल था। हालांकि यह सूचना झूठा गलत थी, एक फेक न्यूज़ जैसी।
भारत तक नहीं पहुंचा था रेडिएशन
चेरनोबिल की रेडियोधर्मी धूल का पहला संकेत स्कैंडेनेविया के मौसम केंद्रों में मिला था। तीन दिन बाद सोवियत संघ ने हादसे को स्वीकार किया। उपलब्ध वैज्ञानिक मानचित्रों के अनुसार, भारत तक कोई ख़तरनाक रेडिएशन नहीं पहुंचा था। ढुंगरी गांव के पुरोहित का दावा सच नहीं था। यह एक अफवाह से आगे कुछ नहीं था।
मनाली में रहने वाले पीटर वोलगे याद करते हैं कि चेरनोबिल के बाद उन्हें पीली-हरी सी धुंध ज़रूर दिखी थी, लेकिन बाद में समझ आया कि वह देवदार और फ़र के पराग का बादल था, जो वसंत-गर्मियों में कुल्लू- मनाली घाटी में आम बात होती है। ढुंगरी गांव में काली रेडियोधर्मी घटा नहीं, बल्कि प्रकृति का मौसमी चक्र था।
सच व कल्पना के बीच एक धुंधली रेखा
हिमालय सिर्फ़ भूगोल नहीं, स्मृतियों का भी पहाड़ है। यहाँ वैश्विक घटनाएँ स्थानीय कहानियों में ढल जाती हैं अलाव तापते हुए किस्से सुनना, टीवी से ज़्यादा मनोरंजक था। यही तो था उस दौर का मनाली, जहाँ अफ़वाहें भी कहानी बन जाती थीं और डर भी लोककथा में बदल जाता था। यहां आने वाला हर विदेशी यात्री अपने साथ एक मिथक ले जाता था।
आज जब यात्राएं इंस्टाग्राम रील्स तक सिमट गई हैं, येती जुईस जैसे लोग हमें उस दौर की याद दिलाते हैं, जब सफ़र लंबा होता था, रास्ते मुश्किल और कहानियां दिल से निकलती थीं। सच व कल्पना के बीच एक धुंधली रेखा खिंच जाती है। ढुंगरी गांव का पुरोहित शायद गलत था, लेकिन उसकी कहानी मनाली के सांस्कृतिक फोकलोर का हिस्सा बन गई।
यात्राओं की यादें सांझा करते येती जुईस
येती जुईस अध्ययन, यात्राओं, पहाड़ों और दुनिया को देखने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई में अध्ययन किया और चैपमैन यूनिवर्सिटी में भी पढ़ाई की। कैलिफ़ोर्निया की पृष्ठभूमि और हवाई यूनिवर्सिटी का अनुभव, उनके खुले विचारों और घुमक्कड़ी स्वभाव को साफ झलकाता है।
सोशल मीडिया पर वे अपनी यात्राओं की यादें सांझा करने, पहाड़ों और हिमालय से जुड़े अनुभव सुनने और 70–80 के दशक के ट्रैवल किस्से बताने के लिए जाने जाते हैं। उनके पोस्ट किसी टूर गाइड की तरह नहीं, बल्कि जीए हुए अनुभवों की डायरी जैसे लगते हैं।
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