पालमपुर के सेंट ल्यूक अस्पताल की पहाड़ी बोलने वाली अंग्रेज़ महिला डॉक्टर, सवा सदी पहले सामाजिक चेतना जगाने वाली डॉ. हेलेन हैनसन
पालमपुर के सेंट ल्यूक अस्पताल की पहाड़ी बोलने वाली अंग्रेज़ महिला डॉक्टर, सवा सदी पहले सामाजिक चेतना जगाने वाली डॉ. हेलेन हैनसन
विनोद भावुक। पालमपुर
बीसवीं सदी की शुरुआत में, जब पहाड़ी इलाकों में महिलाओं का इलाज कराना सामाजिक व धार्मिक कारणों से बेहद कठिन था, तब कांगड़ा के पालमपुर स्थित सेंट ल्यूक ज़नाना अस्पताल उम्मीद की एक किरण बनकर उभरा था। इस अस्पताल में तैनात डॉ. हेलेन हैनसन ख्याति उस दौर में दूर- दूर तक फ़ेल गई थी। ‘ऑक्सफोर्ड डिक्सनरी ऑफ नेशनल बायोग्राफी- हेलन हैनसन’ इसकी गवाही देती है।
ब्रिटिश इंडिया में ‘ज़नाना’ उस व्यवस्था को कहा जाता था, जहां महिलाओं के लिए अलग और सुरक्षित चिकित्सा व्यवस्था हो, ताकि वे बिना सामाजिक दबाव के इलाज करा सकें। डॉ. हेलेन हैनसन ने पालमपुर के जनाना अस्पताल में काम करते हुए स्थानीय बोली सीखी, वे महिलाओं से सीधा संवाद करती थीं और महिला स्वास्थ्य को सेवा की तरह नहीं, अधिकार की तरह देखती थीं।
महिला मताधिकार आंदोलन की नेत्री
करीब 120 साल पहले पालमपुर में एक ऐसी विदेशी महिला डॉक्टर ने सेवा दी, जिसने न सिर्फ चिकित्सा, बल्कि महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक चेतना की दिशा भी बदल दी। पालमपुर जैसे दूरस्थ क्षेत्र में एक ब्रिटिश महिला डॉक्टर का आकर स्थानीय महिलाओं का इलाज करना उस दौर में एक बड़ा क्रांतिकारी कदम था।
डॉ. हेलेन हैनसन सिर्फ मिशनरी डॉक्टर नहीं थीं। वे ब्रिटेन में महिला मताधिकार आंदोलन की सक्रिय नेता भी थीं। भारत आने से पहले और बाद में उन्होंने ब्रिटेन में महिलाओं को वोट का अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष किया और जेल भी गईं। महिला जीवन को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने हर मोर्चे पर बेहद सार्थक भूमिका अदा की।
प्रथम विश्व युद्ध में सर्विस
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान डॉ. हेलेन हैनसन ने रेड क्रॉस, स्कॉटिश विमेंस हॉस्पिटल और ब्रिटिश आर्मी मेडिकल कॉर्प्स (कैप्टन रैंक) में सेवाएं दीं। पालमपुर में रहते हुए उन्होंने महसूस किया कि अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों में भी मानवीय करुणा की जड़ एक जैसी है। पालमपुर का अनुभव उनके जीवन का सबसे मानवीय अध्याय माना जाता है।
1956 में एक सड़क दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई। आज पालमपुर की धरती पर उसकी याद इतिहास हो चुकी है, लेकिन महिला स्वास्थ्य, सेवा और समानता की जो नींव उन्होंने रखी, वह आज भी जीवित है। ग्रामीण स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और मिशनरी सेवाओं में डॉ. हेलेन हैनसन जैसी शख्सियतें हमें याद दिलाती हैं कि पालमपुर सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता नहीं, सामाजिक बदलाव का साक्षी भी रहा है।
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