डलहौजी और कसौली में बनी थी फ्रांस, बेल्जियम, इराक और फिलिस्तीन के युद्धों की रणनीति

डलहौजी और कसौली में बनी थी फ्रांस, बेल्जियम, इराक और फिलिस्तीन के युद्धों की रणनीति
डलहौजी और कसौली में बनी थी फ्रांस, बेल्जियम, इराक और फिलिस्तीन के युद्धों की रणनीति
विनोद भावुक। धर्मशाला
आइये, इतिहास की अनसुनी परत खोलते हैं। जिस डलहौजी और कसौली को आप ‘हनीमून डेस्टिनेशन’ और ‘वीकेंड गेटवे’ के तौर पर जानते हैं, ये शहर कभी वैश्विक युद्ध इतिहास यही ग्लोबल वार हिस्ट्री के गवाह रहे हैं। यहां की पुरानी बैरकें, चर्च, सड़कें और छावनियों के अवशेष, चुपचाप उस दौर की कहानी सुनते हैं, जब यहां से मोर्चे पर गए सैनिक निकलकर यूरोप की बर्फीली खाइयों में लड़े थे।
हिमाचल प्रदेश के स्थानीय हिन्दी मीडिया में इस बारे में कम ही चर्चा हुई है कि प्रथम विश्व युद्ध (World War–I) के समय डलहौजी और कसौली दोनों जगहें ब्रिटिश भारतीय सेना की सबसे अहम सैन्य इकाई थर्ड लाहौर डिवीजन के प्रमुख केंद्र थे। एफ.डब्ल्यू. पेरी की पुस्तक ‘इंडियन आर्मी डिविजन्स इन वर्ल्ड वार 1’ के मुताबिक यहां से चला ‘लाहौर डिवीजन’ यूरोप और पश्चिम एशिया तक लड़ने गया था।
डलहौजी: पहाड़ों में युद्ध की तैयारी
साल 1914 में जब प्रथम विश्व युद्ध शुरू हुआ, तब थर्ड लाहौर डिवीजन का मुख्यालय डलहौजी में था। यहां से जालंधर, फिरोजपुर और सिरहिंद ब्रिगेड को नियंत्रित किया जाता था। यहीं पर भारतीय सैनिकों, को युद्ध प्रशिक्षण, रणनीतिक अभ्यास, यूरोप भेजने से पहले की तैयारी कराई जाती थी। डलहौजी की छावनियों से हजारों भारतीय सैनिक फ्रांस और बेल्जियम के मोर्चों के लिए रवाना हुए।
कसौली: रणनीति और कमांड सेंटर
कसौली उस समय सिरहिंद इन्फैन्ट्री ब्रिगेड और अंबाला कैवलरी ब्रिगेड का अहम बेस था। यहीं से: सैनिक टुकड़ियों की तैनाती, हथियारों और रसद की योजना घायलों की प्राथमिक देखभाल और सैन्य अधिकारियों की रणनीतिक बैठकों का संचालन होता था। कसौली से कभी फ्रांस मेसोपोटामिया (इराक) और फिलिस्तीन के युद्धों की रणनीति बनी थी।
हिमाचल से यूरोप तक भारतीय सैनिक
थर्ड लाहौर डिवीजन ने बैटल ऑफ ला बासे, बैटल ऑफ नेयुव, चैपल बैटल ऑफ लूज (फ्रांस), मेसोंपोटामियन कॅम्पेन (इराक) और बैटल ऑफ मेगीड्डो (फिलिस्तीन) जैसी ऐतिहासिक लड़ाइयों में हिस्सा लिया। इंपीरियल गेजेट ऑफ इंडिया (1908) कहता है कि डलहौजी और कसौली में प्रशिक्षित भारतीय सैनिकों ने सैन्य परंपरा की वीरता और अनुशासन का झंडा पूरी दुनिया में गाड़ा।
भारतीय सैनिकों के बलिदान की कहानी
इसलिए ज़रूरी है यह इतिहास जानना, क्योंकि यह केवल ब्रिटिश सेना की कहानी नहीं है। यह भारतीय सैनिकों के बलिदान की कहानी है। यह हिमाचल प्रदेश की धरती को विश्व इतिहास से जोड़ने वाली कड़ी है। शांत, ठंडे और खूबसूरत पहाड़ी शहर डलहौजी और कसौली आज भले ही पर्यटन और सुकून के लिए जाने जाते हों, लेकिन इनसे ग्लोबल वार हिस्ट्री का खास पन्ना जुड़ा है।
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Jyoti maurya

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