पहली गोरखा रेजिमेंट ने नाहन के परेड ग्राउंड में रखा था पहला कदम, सिरमौर बटालियन से पहली गोरखा रेजिमेंट बनने की कहानी

पहली गोरखा रेजिमेंट ने नाहन के परेड ग्राउंड में रखा था पहला कदम, सिरमौर बटालियन से पहली गोरखा रेजिमेंट बनने की कहानी
पहली गोरखा रेजिमेंट ने नाहन के परेड ग्राउंड में रखा था पहला कदम, सिरमौर बटालियन से पहली गोरखा रेजिमेंट बनने की कहानी
विनोद भावुक। नाहन
1815 में एंग्लो–नेपाल युद्ध की सीज़फायर लाइन खिंच चुकी थी। रणभूमि में जिन गोरखा योद्धाओं से ब्रिटिश फौज ने फ्रंटल एंगेजमेंट लड़ा था, उन्हीं की वीरता, अनुशासन और फाइटिंग स्पिरिट ने एक अंग्रेज़ सैन्य अधिकारी फ्रेडरिक यंग को रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया।
युद्ध के बाद दुश्मन रहे गोरखाओं को ही रैंक एंड फ़ाइल में शामिल करने का फ्रेडरिक यंग ने एक बोल्ड मिलिट्री डिसीजन लिया। इस ऐतिहासिक फैसले का हेडक्वार्टर बना सिरमौर रियासत की राजधानी नाहन। फ्रेडरिक यंग को मसूरी के संस्थापक के रूप में जाना जाता हो, लेकिन उनकी सबसे मजबूत ऑपरेशनल लेगेसी नाहन से जुड़ी है।
ट्रेनिंग, टर्नआउट और ट्रस्ट
नाहन में गठित की गई यह सैन्य इकाई आगे चलकर सिरमौर बटालियन के नाम से जानी गई। यही बटालियन कालांतर में सेकेंड किंग एडवर्ड ऑन गोरखा राइफल बनी और इस तरह ब्रिटिश सेना की पहली गोरखा रेजिमेंट अस्तित्व में आई। यह केवल एक बटालियन नहीं थी, एक नई सैन्य नीति का प्रयोग था।
1923 में प्रकाशित एल. हेडो जेंकिन की पुस्तक “General Frederick Young, First Commandant of Sirmoor Battalion” के अनुसार, यंग ने गोरखा सैनिकों को हथियार चलाना सिखाये, उन्हें ड्रिल दी, कमान्ड स्ट्रक्चर समझाया और सबसे अहम, उन्हें रेजिमेंटल आइडेंटिटी दी।
नाहन एक सैन्य प्रयोगशाला
19वीं सदी का नाहन एक तरह से मिलिट्री लैब था। नाहन में पहली बार यह सिद्ध हुआ कि पहाड़ी समाजों के योद्धा केवल लोकल मिलिशिया नहीं, बल्कि ग्लोबल फाइटिंग फोर्स बन सकते हैं। नाहन के परेड ग्राउंड में तैयार यही सैनिक आगे चलकर अंग्रेजों के लिए कई मोर्चों पर फाइटर बन कर बने।
गोरखा सैनिक मराठा अभियानों, 1857 के विद्रोह और ब्रिटिश साम्राज्य के कई एक्टिव थिएटर्स ऑफ वॉर में फोर्स मल्टीप्लायर साबित हुए। यंग ने नाहन को लॉजिस्टिक बेस, रिक्रूटमेंट ज़ोन और एडमिनिस्ट्रेटिव मिलिट्री सेंटर के रूप में विकसित किया। आज भी भारतीय गोरखा रेजिमेंट्स और ब्रिटिश गोरखा परंपरा में ड्यूटी, ऑनर और ब्रेवरी के रूप में जीवित है।
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Jyoti maurya

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