नीरज सूद : मंडी से निकला कलाकार, मुंबई में हुनर से किया चमत्कार
नीरज सूद : मंडी से निकला कलाकार, मुंबई में हुनर से किया चमत्कार
सत्य प्रकाश। मंडी
हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी कही जाने वाली ऐतिहासिक नगरी मंडी सिर्फ़ मंदिरों, मेलों और शिवरात्रि उत्सव के लिए ही नहीं जानी जाती। हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी इस शहर ने हिंदी सिनेमा और टेलीविजन को कई सशक्त कलाकार भी दिए हैं।
इन्हीं में एक नाम है नीरज सूद, जिन्होंने अपनी मेहनत, रंगमंचीय प्रशिक्षण और सादगी से पर्दे पर गहरी छाप छोड़ी। नीरज सूद के अभिनय में जो ठहराव और विश्वसनीयता दिखती है, उसकी जड़ें मंडी की उसी जमीन में हैं, जहाँ लोकसंस्कृति, बोली और आम आदमी का संघर्ष रोज़ दिखता है।
सीरियलों, फिल्मों और विज्ञापनों में धूम
नीरज सूद ने 1999 में सोनी टीवी के ‘मिसिंग’ से सिल्वर स्क्रीन पर शुरुआत की। जल्द ही वे ‘कगार’, ‘दृष्टांत’, ‘लेकिन’, ‘थ्रिलर@10’ जैसे धारावाहिकों में नज़र आने लगे। वे अक्सर बड़े सितारों के बीच ऐसे किरदार निभाते दिखे, जो कहानी की रीढ़ बन जाते हैं। कम संवाद, लेकिन गहरी मौजूदगी।
उनका फिल्मी करियर ‘काली सलवार’ से शुरू हुआ। ‘मातृभूमि’, ‘समय’, ‘रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ़ द ईयर’, ‘शुभ मंगल सावधान’, ‘बैंड बाजा बारात’ जैसी फ़िल्मों से पहचान बनी। कैडबरी मिस पलानपुर विज्ञापन में अमिताभ बच्चन के साथ उनकी भूमिका आज भी याद की जाती है। आमिर ख़ान, रेड लेबल, डेलीहंट, आइडिया, डोकोमो जैसे ब्रांड्स के अभियानों में भी वे दिखे।
विजय हाई स्कूल से एनएसडी तक
18 अक्टूबर 1969 को मंडी में जन्मे नीरज सूद की शुरुआती पढ़ाई विजय हाई स्कूल, मंडी में हुई। आगे की पढ़ाई उन्होंने वल्लभ राजकीय महाविद्यालय, मंडी से पूरी की। कॉलेज के दिनों में नाटकों ने उन्हें अभिनय की ओर खींचा। मध्यमवर्गीय परिवार से आने के कारण साधन सीमित थे, लेकिन सपना बड़ा था।
इसी जज़्बे ने नीरज सूद को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली तक पहुंचाया, जहाँ से 1999 में अभिनय का डिप्लोमा लेकर वे मुंबई की ओर रवाना हुए। भले ही कर्मक्षेत्र मुंबई हो, उनकी पहचान आज भी ‘मंडी से आया अभिनेता’ के रूप में होती है। उनकी सफलता यह संदेश है कि छोटा शहर भी बड़े सपनों की शुरुआत हो सकता है।
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