सेंट बीड्स कॉलेज शिमला की स्टूडेंट्स जिसने भारतीय पत्रकारिता में गढ़ा नया मुहावरा, भारत की सबसे बेबाक आवाज़ों में एक तवलीन सिंह

सेंट बीड्स कॉलेज शिमला की स्टूडेंट्स जिसने भारतीय पत्रकारिता में गढ़ा नया मुहावरा, भारत की सबसे बेबाक आवाज़ों में एक तवलीन सिंह
सेंट बीड्स कॉलेज शिमला की स्टूडेंट्स जिसने भारतीय पत्रकारिता में गढ़ा नया मुहावरा, भारत की सबसे बेबाक आवाज़ों में एक तवलीन सिंह
विनोद भावुक। शिमला
शिमला सिर्फ़ एक हिल स्टेशन नहीं है, यह सोच को आकार देने वाली जगह है। शिमला में देवदार के पेड़ों के बीच बसे सेंट बीड्स कॉलेज की सीढ़ियों पर बैठकर एक युवा छात्रा अक्सर दुनिया को समझने की कोशिश करती थी। वही छात्रा तवलीन सिंह आगे चलकर भारत की सबसे बेबाक और स्वतंत्र आवाज़ों में से एक बनी।
उन दिनों शिमला शांत था, लेकिन विचारों से भरा हुआ। धुंध में लिपटी सुबहें, चर्च की घंटियां और किताबों की खुशबू, इन सबने तवलीन सिंह के भीतर सवाल पूछने की आदत पैदा की। उन्होंने पहाड़ों की तरह अडिग रहना और मौसम की तरह बदलते समय को समझना शिमला से सीखा। शिमला ने सिखाया कि है सच लिखो, निर्भीक रहो और उंचाई से देखो।
शिमला की कहानियां बनीं पत्रकारिता की आत्मा
सेंट बीड्स कॉलेज में पढ़ते हुए उन्होंने जाना कि शिक्षा सिर्फ़ डिग्री नहीं, दृष्टि देती है। शिमला की ढलानों पर टहलते हुए इतिहास खुद उनसे बातें करता था। ब्रिटिश दौर की इमारतें, आज़ादी की यादें और आम लोगों की चुप कहानियां, जो आगे चलकर उनकी पत्रकारिता की आत्मा बनीं और उन्हें पुस्तक लेखन के लिए प्रेरित किया।
तवलीन सिंह इंग्लैंड गईं और फिर भारत लौटकर द स्टेट्समैन, द टेलीग्राफ, और द इंडियन एक्सप्रेस जैसी प्रतिष्ठित अखबारों में लिखने लगीं। उनकी कलम में सीधी, साफ़ और बेखौफ़ शिमला की ठंडक और पहाड़ों की स्पष्टता बनी रही। तवलीन सिंह ने शिमला में रहते हुए सीखा कि सवाल पूछना असभ्यता नहीं, ज़िम्मेदारी है।
पत्रकारों की नई पौध के लिए बड़ी सीख
शिमला के पहाड़ों ने तवलीन सिंह को सिखाया कि सत्ता से डरना नहीं, उसे परखना चाहिए। तवलीन सिंह को शिमला में पढ़ते हुए यह एहसास हुआ कि अपनी जड़ों से जुड़कर ही दुनिया को समझा जा सकता है।
शिमला ने तवलीन सिंह को सिर्फ़ पढ़ाया नहीं, उन्हें गढ़ा। शिमला ने उनकी कलम को धार दी और विभिन्न विषयों की समझ पैदा की।
तवलीन सिंह ने पत्रकारिता का एक नया मुहावरा दिया है। आज जब उनकी किताबों में भारत की राजनीति, समाज और सत्ता की परतें खुलती हैं, तो कहीं न कहीं शिमला की वही शांत, लेकिन सजग आत्मा झलकती है। पत्रकारों की नई पौध के लिए तवलीन सिंह की पत्रकारिता एक मिसाल है.
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Jyoti maurya

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