फ्रीलांसर से संस्थान तक: इश्लीन कौर की प्रेरक उड़ान

फ्रीलांसर से संस्थान तक: इश्लीन कौर की प्रेरक उड़ान
फ्रीलांसर से संस्थान तक: इश्लीन कौर की प्रेरक उड़ान
विनोद भावुक। शिमला
कभी अकेले लैपटॉप और सपनों के सहारे काम करने वाली एक युवती, आज एक सशक्त शिक्षण संस्थान की पहचान बन चुकी है। यह कहानी है इश्लीन कौर की, एक ऐसी उद्यमी की, जिन्होंने अस्थिरता से स्थायित्व और अनिश्चितता से आत्मविश्वास तक का सफर तय किया।
साल 2021 में इश्लीन कौर ने सेल्स और मार्केटिंग के क्षेत्र में फ्रीलांसर के रूप में अपना करियर शुरू किया। काम मिल रहा था, आय भी हो रही थी, लेकिन कुछ अधूरा सा था। न पहचान थी, न स्थिरता और न ही भविष्य की स्पष्ट दिशा। हर महीने नए क्लाइंट ढूंढने की दौड़ ने उन्हें यह एहसास कराया कि केवल व्यक्तिगत ‘गिग’ से आगे बढ़कर कुछ स्थायी और प्रभावशाली खड़ा करना ज़रूरी है।
यहीं से जन्म हुआ द एपेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ लर्निंग एंड डेवलपमेंट का। उद्देश्य स्पष्ट था, बिज़नेस ओनर्स, फाउंडर्स और प्रोफेशनल्स को बिखरे प्रयासों के बजाय सुव्यवस्थित सिस्टम के ज़रिए आगे बढ़ने में मदद करना। इश्लीन का मानना है, फ्रीलांसर से बिज़नेस ओनर बनने का सफर आसान नहीं था, लेकिन यही यात्रा आज मेरी सबसे बड़ी पहचान है।”
शुरुआती दिन आसान नहीं थे। सेल्स से लेकर ट्रेनिंग डिलीवरी तक, हर जिम्मेदारी उन्होंने खुद निभाई। लेकिन परिणाम देने की उनकी निरंतर कोशिश ने धीरे-धीरे उन्हें अनिश्चितता से ऑथोरिटी की ओर पहुंचा दिया।
आज द एपेक्स इंस्टीट्यूट छह सदस्यों की मज़बूत टीम के साथ काम कर रहा है, करीब ₹25 लाख का वार्षिक टर्नओवर हासिल कर चुका है और भारत के साथ-साथ USA, UAE और ऑस्ट्रेलिया तक अपनी पहुंच बना चुका है। इश्लीन अब IT फाउंडर्स और सर्विस बिज़नेस ओनर्स को कंसल्टिंग देकर उनके व्यवसाय को तेज़ी से आगे बढ़ाने में योगदान दे रही हैं।
इश्लीन कौर की यह यात्रा केवल एक उद्यमी की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि उन हज़ारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो आज अस्थिरता से जूझ रहे हैं, लेकिन भीतर कहीं एक संस्थान खड़ा करने का सपना पल रहा है। यह कहानी बताती है कि अगर इरादे स्पष्ट हों और मेहनत निरंतर, तो एक व्यक्ति भी बदलाव की पूरी संस्था बन सकता है।
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Jyoti maurya

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