घर की रसोई से राष्ट्रीय पहचान तक: निशु लता सूद की संघर्ष, स्वाद और सफलता की कहानी

घर की रसोई से राष्ट्रीय पहचान तक: निशु लता सूद की संघर्ष, स्वाद और सफलता की कहानी
घर की रसोई से राष्ट्रीय पहचान तक: निशु लता सूद की संघर्ष, स्वाद और सफलता की कहानी
विनोद भावुक। शिमला
कभी अंबोटा गांव की एक साधारण रसोई में पारंपरिक अचार और चटनियों की खुशबू से शुरू हुआ सफर, आज देशभर के बाज़ारों तक पहुंच चुका है। यह कहानी है निशु लता सूद की—जिन्होंने मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर निशु फूड प्रोडक्ट्स को एक भरोसेमंद पहचान बना दिया।
साल 1998 में, जब संसाधन सीमित थे और बाज़ार की समझ भी शुरुआती दौर में थी, निशु लता सूद ने पारंपरिक घरेलू रेसिपीज़ के साथ अपने उद्यम की नींव रखी। अचार, चटनी, मुरब्बा और घरेलू स्नैक्स से शुरू हुआ यह छोटा सा प्रयास, उनके समर्पण और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता के चलते धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया।
उन्होंने स्वाद से कभी समझौता नहीं किया। परंपरा को आधार बनाते हुए उन्होंने समय के साथ नवाचार अपनाया। खासतौर पर मिलेट आधारित उत्पादों की ओर कदम बढ़ाकर आधुनिक पोषण और बदलती उपभोक्ता पसंद को अपने ब्रांड से जोड़ा। यही वजह रही कि घर से शुरू हुआ यह काम एक मान्यता प्राप्त ब्रांड में बदल गया, जिसके उत्पाद आज रिटेल, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और अन्य ब्रांड्स तक पहुंच रहे हैं।
लेकिन निशु लता सूद की कहानी केवल व्यवसायिक सफलता तक सीमित नहीं है। वे ‘पे इट फॉरवर्ड’ की सच्ची मिसाल हैं। एक मास्टर ट्रेनर के रूप में उन्होंने हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पंजाब में सैकड़ों महिलाओं को फूड प्रोसेसिंग और उद्यमिता का प्रशिक्षण दिया, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने सपनों को साकार कर सकें।
मुख्यमंत्री स्टार्टअप योजना और CSIR-IHBT पालमपुर से मिले रणनीतिक सहयोग ने उनके व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। यह समर्थन न केवल तकनीकी और व्यावसायिक मजबूती बना, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी नया विस्तार मिला।
निशु लता सूद खुद कहती हैं, ‘मेरी यात्रा यह दिखाती है कि जुनून, धैर्य और सही सहयोग के साथ महिलाएं अपने सपनों को हकीकत में बदल सकती हैं।’ उनकी यह यात्रा आज उन हज़ारों महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो घर की दहलीज़ से बाहर निकलकर अपनी पहचान बनाना चाहती हैं।
निशु फूड प्रोडक्ट्स की यह कहानी स्वाद की नहीं, संकल्प, संघर्ष और सशक्तिकरण की कहानी है, जो बताती है कि सही इरादों के साथ किया गया छोटा सा कदम भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकता है।
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Jyoti maurya

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