रसोई से रोज़गार तक: नीलम वर्मा ने ‘RS फूड प्रोडक्ट्स’ से आत्मनिर्भरता की मिसाल रची
रसोई से रोज़गार तक: नीलम वर्मा ने ‘RS फूड प्रोडक्ट्स’ से आत्मनिर्भरता की मिसाल रची
विनोद भावुक। शिमला
कभी घर की चारदीवारी तक सीमित एक गृहिणी, आज अपने गांव की कई महिलाओं के लिए रोज़गार और आत्मविश्वास का सहारा बन चुकी हैं। यह कहानी है नीलम वर्मा की, जिन्होंने मेहनत, हुनर और सही मार्गदर्शन से RS फूड प्रोडक्ट्स को एक पहचान दिलाई। सोलन ज़िले के रहाट गांव से ताल्लुक रखने वाली नीलम वर्मा का शुरुआती जीवन सामान्य था। गृहिणी के रूप में उनका समय सिलाई-कढ़ाई और घर-गृहस्थी में बीतता था। लेकिन आर्थिक मजबूती की चाह और कुछ अलग करने की ललक उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रही। साल 2015 उनके जीवन में टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जब उन्होंने फूड प्रोसेसिंग से जुड़ा एक प्रशिक्षण कार्यक्रम जॉइन किया।
इस प्रशिक्षण ने उनके हुनर को दिशा दी। पति के सहयोग और अपने आत्मविश्वास के बल पर नीलम वर्मा ने RS फूड प्रोडक्ट्स की शुरुआत की। घर की रसोई में तैयार होने वाले पारंपरिक अचार, चटनियां और शरबत अब व्यवस्थित रूप से बाज़ार तक पहुंचने लगे। स्वाद, शुद्धता और परंपरा, इन तीनों को उन्होंने अपने ब्रांड की पहचान बनाया।
सरकारी योजनाओं और संस्थागत सहयोग ने उनके सपनों को और पंख दिए। जिला उद्योग केंद्र (DIC) सोलन, डेवलपमेंट ब्लॉक कंडाघाट और ऑर्गेनिक मिशन शिमला से मिले अनुदान और मार्केटिंग सहयोग ने RS फूड प्रोडक्ट्स को विस्तार देने में अहम भूमिका निभाई।
आज RS फूड प्रोडक्ट्स न केवल बाज़ार में एक भरोसेमंद नाम है, बल्कि गांव की ज़रूरतमंद महिलाओं के लिए रोज़गार का साधन भी बन चुका है। नीलम वर्मा उनके साथ काम करने वाली महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दे रही हैं—ठीक वैसे ही, जैसे कभी उन्होंने खुद के लिए यह राह चुनी थी।
नीलम वर्मा का संदेश साफ़ है, “मैं हर महिला से कहना चाहती हूं—खुद पर विश्वास रखें, आगे बढ़ें और अपनी अलग पहचान बनाएं।” उनकी यह यात्रा बताती है कि अगर संकल्प मज़बूत हो और हुनर पर भरोसा हो, तो रसोई से निकलकर भी एक सफल उद्यम खड़ा किया जा सकता है। RS फूड प्रोडक्ट्स की कहानी केवल एक व्यवसाय की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर महिला, स्थानीय स्वाद और ग्रामीण सशक्तिकरण की सच्ची कहानी है, जो आज कई महिलाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है।
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