सपने से सेवा तक: ‘बसंत आई क्लिनिक’ ने बदली दृष्टि, बदला जीवन

सपने से सेवा तक: ‘बसंत आई क्लिनिक’ ने बदली दृष्टि, बदला जीवन
सपने से सेवा तक: ‘बसंत आई क्लिनिक’ ने बदली दृष्टि, बदला जीवन
विनोद भावुक। शिमला
कुछ सपने निजी होते हैं, लेकिन जब उन्हें सही समर्थन और संकल्प मिल जाए, तो वे समाज की अमूल्य धरोहर बन जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है डॉ. गुंजन जोशी की, जिन्होंने अपने सपने को केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि समुदाय-सेवा का मिशन बनाया। बसंत आई क्लिनिक’ की स्थापना किसी व्यावसायिक योजना से नहीं, बल्कि भावनाओं से हुई। यह क्लिनिक संस्थापक के दिवंगत पिता की स्मृति में एक हृदयस्पर्शी श्रद्धांजलि है, जहां समर्पण और चिकित्सकीय विशेषज्ञता साथ मिलती हैं। लक्ष्य साफ़ था: ऐसी सुविधा खड़ी करना, जहां गुणवत्तापूर्ण नेत्र-चिकित्सा हर ज़रूरतमंद तक पहुंचे।
भावनात्मक संकल्प को ज़मीन पर उतारने के लिए संसाधनों की ज़रूरत थी। यहीं निर्णायक भूमिका निभाई मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना (MMSY) ने। इस सरकारी समर्थन से आवश्यक वित्तीय प्रोत्साहन और तकनीकी सुदृढ़ीकरण संभव हुआ और क्लिनिक आधुनिक उपकरणों के साथ विशेषज्ञ नेत्र-सेवा देने के लिए तैयार हो सका।
परिणाम असाधारण रहे। सिर्फ़ तीन वर्षों में ‘बसंत आई क्लिनिक’ जिले के शीर्ष विशेष नेत्र केंद्रों में शुमार हो गया। सटीक निदान, उन्नत तकनीक और मानवीय संवेदना, इन तीनों के संतुलन ने क्लिनिक को भरोसे का नाम बना दिया। डॉ. गुंजन जोशी कहती हैं, “मैं उस अवसर के लिए आभारी हूं, जिसने एक सपने को टिकाऊ दृष्टि में बदल दिया। आज यह क्लिनिक सिर्फ़ इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि उम्मीद और भरोसे का प्रतीक है—जहां हर मरीज़ को सम्मान, हर दृष्टि को रोशनी मिलती है।
बसंत आई क्लिनिक’ की यात्रा बताती है कि जब व्यक्तिगत संकल्प, सरकारी सहयोग और पेशेवर प्रतिबद्धता साथ आते हैं, तो स्वास्थ्य सेवाएं भी सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन जाती हैं। यह कहानी सिर्फ़ एक क्लिनिक की नहीं—सपनों के सार्वजनिक संपत्ति बनने की कहानी है।
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Jyoti maurya

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