सपने से स्टार्टअप तक: ‘देवतरु’ ने दिखाया हिम्मत हो तो असंभव कुछ भी नहीं
सपने से स्टार्टअप तक: ‘देवतरु’ ने दिखाया हिम्मत हो तो असंभव कुछ भी नहीं
विनोद भावुक। शिमला
कई लोग सपने देखते हैं, लेकिन कुछ ही उन्हें सच करने की हिम्मत जुटाते हैं। यह कहानी है योगितराज शर्मा की, जिन्होंने यह ठान लिया था कि कभी कोशिश ही न करने का पछतावा लेकर बूढ़ा नहीं होना है।
बीस की उम्र से काम उनके जीवन का हिस्सा रहा। एक स्थिर करियर और ट्रैवल बिज़नेस में पहले झटके के बावजूद उद्यमिता का सपना बुझा नहीं। ‘देवतरु’ का विचार उन्हें एकदम स्पष्ट रूप में, एक सपने में दिखा। यहीं से शुरुआत हुई उस यात्रा की, जिसने घरेलू नुस्खे को एक राष्ट्रीय ब्रांड में बदल दिया।
योगितराज ने अपनी बहन के घर में बनने वाले पारंपरिक हेयर ऑयल को व्यावसायिक रूप देने का निर्णय लिया। खुद का लोगो डिज़ाइन किया, परिवार के सहारे ब्रांड लॉन्च किया और एक स्पष्ट दर्शन अपनाया—100% प्राकृतिक। यह सिर्फ़ उत्पाद नहीं, भरोसे का वादा था।
28 अक्टूबर 2025 को ‘देवतरु’ हेयर ऑयल आधिकारिक तौर पर लॉन्च हुआ। शुरुआती शिपमेंट्स में दिल्ली और शिमला भेजी गई खेप में बोतलें टूट गईं, जो नए उद्यमी के लिए दिल तोड़ने वाला पल। लेकिन यहीं से सीख मिली। पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स सुधारे गए और खेल पलट गया।
योगितराज कहती हैं, अगर आपके पास इच्छाशक्ति और जुनून है, तो कुछ भी असंभव नहीं। आज ‘देवतरु’ सिर्फ़ एक ब्रांड नहीं, बल्कि हिम्मत, सीख और निरंतर सुधार की मिसाल है—जो बताती है कि असफलता अंत नहीं, सही दिशा में अगला कदम होती है। ‘देवतरु’ की कहानी हर उस सपने देखने वाले के लिए प्रेरणा है, जो शुरुआत से डरता है। यह याद दिलाती है—कोशिश की जाए तो रास्ते खुद बनते हैं, और पछतावे की जगह उपलब्धि ले लेती है।
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