लाहौल की ऊन से औषधियों तक: ‘लाहौल बास्केट’ ने रचा आत्मनिर्भर हिमालय की कहानी

लाहौल की ऊन से औषधियों तक: ‘लाहौल बास्केट’ ने रचा आत्मनिर्भर हिमालय की कहानी
लाहौल की ऊन से औषधियों तक: ‘लाहौल बास्केट’ ने रचा आत्मनिर्भर हिमालय की कहानी
विनोद भावुक। शिमला
बर्फ़ीली वादियों में जहां जीवन संघर्ष से आकार लेता है, वहीं अनुशासन और सामूहिक मेहनत नई राहें खोलती हैं। ऐसी ही एक मिसाल है लाहौल बास्केट, एक ऐसा ब्रांड, जिसने पारंपरिक ऊन को आधुनिक बाज़ार से और हिमालयी जड़ी-बूटियों को स्वास्थ्य से जोड़ दिया। इस प्रेरक यात्रा की अगुवाई कर रही हैं अनीता नालवा।
साल 2003 में लाहौल बास्केट की नींव एक सेल्फ हेल्प ग्रुप के रूप में पड़ी। फोकस था क्षेत्र की पहचान लाहौली ऊनी मोज़े। आजीविका के छोटे प्रयास ने वित्तीय अनुशासन की बदौलत मज़बूत आधार बनाया। समूह ने यूको बैंक से ₹1.82 लाख का ऋण लेकर न केवल सुरक्षित किया, बल्कि समय पर चुका भी दिया, यही भरोसा आगे की उड़ान बना।
2019 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ाव ने राह खोल दी। प्रीमियम प्रदर्शनियों और स्टॉल्स में भागीदारी मिली, पारंपरिक उत्पादों को दृश्यता मिली और बिक्री में तेज़ी आई। पहाड़ों की मेहनत अब देशभर के ग्राहकों तक पहुंचने लगी।
उद्यमी सोच का असली इम्तिहान तब हुआ जब अनीता नालवा ने हैंडलूम से आगे बढ़ने का फैसला किया। 2021 में NIFT कांगड़ा के साथ ‘Secure Himalaya’ प्रोजेक्ट के तहत पांगी क्षेत्र में 45 दिन का गहन कार्य और फिर हिमालयी वनस्पतियों की क्षमता को पहचानते हुए औषधीय पौधों में विशेषज्ञ प्रशिक्षण। RSETI धर्मशाला और RCFC जोगिंदर नगर से मिली सीख ने लाहौल बास्केट को ड्युअल-स्पेशियलिटी ब्रांड में बदल दिया।
आज लाहौल बास्केट पारंपरिक ऊनी उत्पादों के साथ-साथ मूल्यवर्धित हर्बल उत्पाद भी पेश करता है और इन्हें ORGANIC/Organise जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सफलतापूर्वक बाज़ार में उतारा जा रहा है। अनीता नालवा कहती हैं, “मोज़े बुनने से लेकर हिमालयी जड़ी-बूटियों के प्रसंस्करण तक हमारी यात्रा लाहौल की आत्मा को सहेजने की है।
2003 से निरंतर संचालन, NIFT व RCFC जैसे संस्थानों की साझेदारी और लाहौली ऊन व हर्बल उत्पादों की विशिष्ट रेंज—लाहौल बास्केट आज आत्मनिर्भर हिमालय का प्रतीक है। यह कहानी बताती है कि जब स्थानीय पहचान, सही प्रशिक्षण और बाज़ार की समझ एक साथ आती है, तो पहाड़ों से भी टिकाऊ विकास की मिसाल खड़ी हो जाती है।
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Jyoti maurya

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