129 साल पहले ब्रिटिश पत्रिका Punch के छपे कार्टून का शिमला कनेक्शन, ‘स्वास्तिक’ और ‘क्रॉस’ के बीच फंसी कांग्रेस’

129 साल पहले ब्रिटिश पत्रिका Punch के छपे कार्टून का शिमला कनेक्शन, ‘स्वास्तिक’ और ‘क्रॉस’ के बीच फंसी कांग्रेस’
129 साल पहले ब्रिटिश पत्रिका Punch के छपे कार्टून का शिमला कनेक्शन, ‘स्वास्तिक’ और ‘क्रॉस’ के बीच फंसी कांग्रेस’
विनोद भावुक। शिमला
शिमला के माल रोड पर टहलते हुए आपको लगे कि राजनीति यहां नई आई है, तो ज़रा 129 साल पीछे चलिए। साल 1896, ब्रिटिश साम्राज्य अपने चरम पर था और शिमला ब्रिटिश हुकूमत की ग्रीष्मकालीन राजधानी होने के कारण सत्ता, नीति और प्रयोगशालाओं का केंद्र था। इसी दौर में ब्रिटिश पत्रिका Punch में एक व्यंग्यात्मक कार्टून छपा जिसका शीर्षक था: ‘The Congress Cross or Swastik’
इस चित्र में दो पात्र हैं। पहला पात्र भारत माता (या भारत का प्रतीक) पारंपरिक रूप में साड़ी में और हाथ में लाठी, लेकिन निर्णय की दुविधा में। दूसरा पात्र ब्रिटिश सिविल सर्वेंट एलन ऑक्टेवियन ह्यूम। वही ह्यूम जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापकों में प्रमुख थे और जिनका शिमला से गहरा रिश्ता रहा। Punch पत्रिका की यह कॉपी ब्रिटिश लाइब्रेरी आर्काइव में मौजूद है।
कांग्रेस भारतीय है या ब्रिटिश ढांचे में ढली हुई?
ह्यूम भारत के एक ऐसे चिह्न की ओर इशारा करते दिखते हैं, जो कहीं क्रॉस जैसा है, कहीं स्वास्तिक जैसा है। इशारों में मतलब साफ है कि पता ही नहीं चलता कि कांग्रेस भारतीय है या ब्रिटिश ढांचे में ढली हुई है? शिमला जहाँ विचार गढ़े जाते थे, कम ही लोग जानते हैं कि ह्यूम लंबे समय तक शिमला में रहे और कांग्रेस के प्रारंभिक विचार यहीं उनके ड्रॉइंग रूम, क्लब और लॉन में पके थे।
उस दौर का शिमला राजनीतिक प्रयोगशाला था। ब्रिटिश सत्ता चाहती थी कि असंतोष को संवैधानिक बहस में बदला जाए। क्रांति नहीं, रेजुलुशन हो। गोली नहीं, मिनट्स ऑफ मीटिंग हों Punch के कार्टून ने कांग्रेस को आधी भारतीय परंपरा और आधा ब्रिटिश नैतिक ढांचा दिखाया। इतिहासकार विपिन चंद्र पाल अपनी पुस्तक ‘इंडियाज़ स्ट्रगल फॉर इंडिपेंडेंस’ में उस दौर की कांग्रेस को ऐसी ही बताया है।
आंदोलन भारत का है, या ब्रिटेन का सुरक्षित प्रयोग
कार्टून का संदेश व्यंग्य में था, लेकिन सवाल गंभीर था कि क्या यह आंदोलन भारत का है, या भारत के लिए ब्रिटेन का सुरक्षित प्रयोग है? प्रतीकों की राजनीति की ओर इशारा था। स्वास्तिक भारत में हज़ारों वर्षों से शुभ, समृद्धि और मंगल का प्रतीक है, जबकि क्रॉस यूरोपीय ईसाई सभ्यता और नैतिक संरचना का प्रतीक है। राम चंद्र गुहा ‘इंडिया आफ्टर गांधी’ में ऐसा ही सवाल उठाते हैं।
Punch का व्यंग्य यह था कि कांग्रेस कहीं भारतीय प्रतीक अपनाती है, तो कहीं ब्रिटिश सोच का सहारा लेती है। यह सब शिमला की शांत पहाड़ियों में तय हो रहा था। सबक यह है कि जब राजनीति प्रतीकों पर लड़ती है और इतिहास को अपनी सुविधा से पढ़ा जाता है तो यह कार्टून याद दिलाता है कि राजनीतिक आंदोलनों की जड़ें अक्सर वहां होती हैं, जहां सत्ता छुट्टियां मनाती है।
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Jyoti maurya

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