पाकिस्तान की ‘लक्स लेडी’ का शिमला कनेक्शन, अमेरिका के फिलाडेल्फिया में हुई हादसे का शिकार

पाकिस्तान की ‘लक्स लेडी’ का शिमला कनेक्शन, अमेरिका के फिलाडेल्फिया में हुई हादसे का शिकार
पाकिस्तान की ‘लक्स लेडी’ का शिमला कनेक्शन, अमेरिका के फिलाडेल्फिया में हुई हादसे का शिकार
विनोद भावुक। शिमला
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों की जन्मस्थली रहा है, जिन्होंने आगे चलकर नया इतिहास लिखा। ब्रिटिश शिमला में पैदा हुई फौज़िया सईद ऐसी ही एक शख़्सियत थीं, जो भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान चली गईं, पर भी उसकी चमक बरकरार रही। ग्लैमर की दुनिया में उन्हें पाकिस्तान की पहली ‘लक्स लेडी’ के रूप में जाना जाता है।
14 जुलाई 1942 को शिमला में जन्मी फौज़िया सईद हई शिक्षित और प्रतिष्ठित लोहारू रियासत से थीं। उनके पिता साहिबज़ादा मिर्ज़ा ज़हीरुद्दीन बाबर और माता क़मर बेगम थीं। उस दौर में शिमला, सत्ता, संस्कृति और उच्च वर्गीय जीवनशैली का केंद्र था। शिमला का यही वातावरण फौज़िया की सुरुचिपूर्ण शख़्सियत में भी झलकता है।
16 साल की उम्र में ‘लक्स लेडी’
महज़ 16 वर्ष की उम्र में फौज़िया ने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा और पाकिस्तान में लक्स साबुन के विज्ञापनों का पाकिस्तानी चेहरा बनीं। उस दौर में पाकिस्तान में विज्ञापन और फैशन इंडस्ट्री अपने शुरुआती चरण में थी। फौज़िया की यह कोई साधारण उपलब्धि नहीं थी। उनकी तस्वीरें पाक में होर्डिंग्स और प्रिंट मीडिया में छाईं हिन थी।
जनवरी 1961 में ब्रिटेन की महारानी क्वीन एलिज़ाबेथ द्वितीय के पाकिस्तान दौरे के दौरान आयोजित विशेष फैशन शो में फौज़िया सईद हई को चुना गया। यह फैशन शो केवल सौंदर्य प्रदर्शन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और कूटनीतिक प्रस्तुति भी था। अपनी तरह के इस खास आयोजन में फौज़िया इस मंच की प्रमुख चेहरों में थीं।
एक युग की पहचान
1960 के दशक में फौज़िया लक्स, डालडा, टुल्लो, ड्यू, बानो बनस्पति जैसे बड़े ब्रांड्स का चेहरा बनीं। उनकी पहचान सिर्फ़ सुंदरता तक सीमित नहीं थी। फौज़िया गरिमा, शालीनता और आधुनिकता का संतुलन थी, जो उनकी सबसे बड़ी ताक़त थी। उनका जलवा न केवल पाकिस्तान में था, भारत में भी उसके हुनर के कायल थे।
1968 में मात्र 25 वर्ष की उम्र में अमेरिका के फिलाडेल्फिया में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना में उनका निधन हो गया। तैराकी के दौरान उन्हें अस्थमा अटैक और एन्यूरिज़्म हुआ। उनकी असमय मृत्यु ने फैशन और मीडिया जगत को गहरा आघात पहुंचाया। उनकी याद में मशहूर पाकिस्तानी कवि तौफ़ीक़ रफ़अत ने नज़्म लिखी थी।
शिमला का वैश्विक कनेक्शन
फौज़िया सईद हई की कहानी शिमला के उस अंतरराष्ट्रीय चरित्र को उजागर करती है, जहां से निकली प्रतिभाएं सीमाओं से परे अपनी पहचान बनाती रही हैं। शिमला सिर्फ़ पहाड़ों का शहर नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और ग्लोबल कहानियों की जन्मभूमि भी है। फौज़िया केवल एक मॉडल नहीं, बल्कि अपने समय की सांस्कृतिक प्रतीक थीं।
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Jyoti maurya

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