कसौली में आकार सच हुई कहानी, ‘अमृत’ साबित हुआ गंगा का पानी
कसौली में आकार सच हुई कहानी, ‘अमृत’ साबित हुआ गंगा का पानी
अजय शर्मा। कसौली
क्या आपको पता है कि गंगाजल की रहस्यजनक शक्ति का पता दुनिया को कसौली में हुए शोध से लगा था? जी हां, महान वैज्ञानिक अर्नेस्ट हैनबरी हैंकिन ने जब देखा कि भारत में हैजा का प्रकोप सूक्ष्मजीवों की वजह से होता हैं, तो कसौली में शोध से साबित किया था कि गंगा के पानी में ऐसा तत्व है, जो हैजा के बैक्टीरिया को 3 घंटे में मार देता है।
अर्नेस्ट हैंकिन इस निष्कर्ष तक पहुंचे थे कि गंगाजल एक अदृश्य जीवाणु-विनाशक एजेंट’ है, जिसे आज हम बैक्टेरियोफेज के रूप में जानते हैं। उन्होंने यह जानकारी भारत की आम जनता तक पहुंचाई। इस जानकारी का प्रसार सारे देश में करने के लिए उन्होंने स्थानीय भाषाओं में भी उक्त जानकारी प्रकाशित कराई। अर्नेस्ट हैंकिन ने हैजा और महामारी नियंत्रण के लिए भारत में अद्भुत काम किया।
कसौली का पोश्चर इंस्टीट्यूट
सोलन जिले की शांत पहाड़ियों में बसे छोटे हिल स्टेशन कसौली ने बड़ी वैज्ञानिक खोजों का इतिहास लिखा है। भारत में हैजा जैसी महामारी से पार पाने का समाधान भी इस छोटे से स्थान पर ढूंढा गया। यहां जो शोध हुआ, 21वीं सदी में कंप्यूटर क्रांति में बहुत उपयोगी साबित हुआ। कम ही लोगों को जानकारी होगी कि कसौली में 1904 में पोश्चर इंस्टीट्यूट की स्थापना हुई थी।
इंस्टीट्यूट की स्थापना से 8 साल पहले 1896 में ही अर्नेस्ट हैंकिन अपने शोध से साबित कर चुके थे कि गंगा और यमुना के पानी में ऐसा तत्व है जो हैजा के बैक्टीरिया को मार देता है। अर्नेस्ट हैंकिन ने गंगा और यमुना की जल शक्ति में रहस्यमय जीवाणु-विनाशक गुणों का पता लगाया। यह उस दौर की सबसे बड़ी खोजों में एक थी।
विमान और ग्लाइडिंग के सिद्धांतों में नई दिशा
अर्नेस्ट हैंकिन का जन्म 4 फरवरी 1865, इंग्लैंड के वेर में हुआ था। पढ़ाई में तेज और उत्साही उन्होंने सेंट जॉन कॉलेज केंब्रिज से नेचुरल साइन्स में प्रथम श्रेणी की डिग्री हासिल की। उनके बारे में मशहूर है कि वह दवाओं की मात्रा बढ़ा देना या पाचन तेज करने के लिए गर्म गोलियों पर लेटना जैसे प्रयोग अक्सर अपने ऊपर करते रहते थे।
अर्नेस्ट हैंकिन 1892 में वह भारत आए और आगरा में केमिकल एग्जाइमर और बैक्टीरियालोजिस्ट के रूप में नियुक्त हुए। बैक्टीरिया विशेषज्ञ होने के साथ उन्होंने आगरा और बॉम्बे में पक्षियों की उड़ान और थर्मल करंट्स का अध्ययन किया। उनके ‘सोरिंग बर्ड्स’ पर अध्ययन ने विमान और ग्लाइडिंग के सिद्धांतों में नई दिशा दी। ‘द ड्राइंग ऑफ जियोमेट्रिक पैटर्नस सरसेनिक आर्ट (1925) उनका प्रमुख प्रकाशन है।
आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान में उपयोगी अनुसंधान
अर्नेस्ट हैंकिन ने अनुसंधान पद्धति में होरिजॉन्टल शीशे पर पक्षियों की उड़ान ट्रेस की और ऊर्जा और लिफ्ट के सिद्धांत समझाए। कसौली में रहते हुए उन्होंने मुगल वास्तुकला और इस्लामिक ज्यामितीय पैटर्न का अध्ययन किया और पैटर्न ड्रॉइंग की तकनीकें विकसित कीं। उनका काम 21वीं सदी में कंप्यूटर विज्ञान और गणित में बेहद उपयोगी साबित हुआ।
कसौली की पहाड़ियों में अर्नेस्ट हैंकिन ने विज्ञान और स्वास्थ्य क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया। उन्होंने भारत में बैक्टीरिया और महामारी नियंत्रण की समझ को आगे बढ़ाया और पक्षी विज्ञान और ज्यामितीय कला में नए विचार दिए। उनकी खोजों और अनुसंधान का प्रभाव आज भी वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और शैक्षिक क्षेत्र में महसूस किया जाता है।
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