शिमला की एलर्जली बिल्डिंग की दीवारों और सीढ़ियों में महसूस किया जा सकता है ब्रिटिश मेजर जनरल हर्बर्ट एबट के हुनर का कमाल
शिमला की एलर्जली बिल्डिंग की दीवारों और सीढ़ियों में महसूस किया जा सकता है ब्रिटिश मेजर जनरल हर्बर्ट एबट के हुनर का कमाल
विनोद भावुक। शिमला
एलर्जली बिल्डिंग शिमला में स्थित हिमाचल प्रदेश सचिवालय से शासन की फाइलें चलती हैं, फैसले होते हैं और नीतियां आकार लेती हैं। कम ही लोग जानते हैं कि शिमला की इस ऐतिहासिक इमारत की नींव एक ऐसे ब्रिटिश सैन्य अधिकारी ने रखी थी, जो केवल सैनिक होने के साथ इतिहास और स्थापत्य में भी गहरी रुचि रखता था।
मेजर जनरल हर्बर्ट एडवर्ड स्टेसी एबट ब्रिटिश भारतीय सेना के अधिकारी और शिमला की विरासत से जुड़ा एक महत्वपूर्ण नाम है। 1886 के आसपास, हर्बर्ट एबट ने छोटा शिमला में एलर्जली भवन की रूपरेखा तैयार की। ब्रिटिश राज में शिमला भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी होने के चलते प्रशासनिक शक्ति का केंद्र था। एलर्जली बिल्डिंग उसी शक्ति का स्थापत्य प्रतीक बना।
शिमला में सांस ले रही एबट की सोच
हर्बर्ट एबट का शिमला से रिश्ता केवल नौकरी तक सीमित नहीं था। वे उस दौर के उन ब्रिटिश अधिकारियों में थे, जो प्रशासन के साथ-साथ शहर की संरचना और सौंदर्य में भी हस्तक्षेप करते थे।
एलर्जली बिल्डिंग इस बात की गवाही देता है कि किस तरह ब्रिटिश अधिकारी शिमला को सत्ता, नियंत्रण और आराम, तीनों का केंद्र बनाना चाहते थे।
शिमला की पहचान उन लोगों की कहानियों से भी बनी है, जिन्होंने इसके रूप और इतिहास को गढ़ा। हर्बर्ट एडवर्ड स्टेसी एबट उन्हीं नामों में से एक हैं। उनकी सोच के मुताबिक शिमला की पहाड़ियों के अनुरूप बनी एलर्जली बिल्डिंग न केवल वास्तुकला का नमूना है, बल्कि औपनिवेशिक शासन की सोच, अनुशासन और केंद्रीकरण का भी प्रतीक है।
नेशनल आर्मी म्यूज़ियम लंदन में महफूज तस्वीरें
19 नवंबर 1814 को लंदन के केंसिंग्टन में जन्मे हर्बर्ट एडवर्ड स्टेसी एबट, ईस्ट इंडिया कंपनी और बाद में ब्रिटिश क्राउन की सेनाओं में उच्च पद तक पहुंचे। 74वीं नेटिव इनफेंट्री से अपने सैन्य जीवन की शुरुआत करने वाले एबट ने 1857 के विद्रोह के दौरान दिल्ली की घटनाओं पर आधारित एक महत्वपूर्ण विवरण लिखा। यह पुस्तक 1857 की घटनाओं को समझने का एक अहम दस्तावेज मानी जाती है।
1883 में एबट का निधन हुआ, लेकिन शिमला में उनकी उपस्थिति एलर्जली बिल्डिंग की दीवारों में, सचिवालय की सीढ़ियों में आज भी महसूस की जा सकती है। एबट का पारिवारिक जीवन भी रोचक रहा। उनके पुत्र हर्बर्ट एबट एक प्रसिद्ध क्रिकेटर बने और एक सम्मानित सैन्य अधिकारी भी रहे। नेशनल आर्मी म्यूज़ियम, लंदन में जनरल एबट की तस्वीरें और पदक सुरक्षित हैं।
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