कांगड़ा का काठमांडू कनेक्शन : नेपाल की शाही रानी बनी कांगड़ा की राजपूत राजकुमारी दिव्येश्वरी

कांगड़ा का काठमांडू कनेक्शन : नेपाल की शाही रानी बनी कांगड़ा की राजपूत राजकुमारी दिव्येश्वरी
कांगड़ा का काठमांडू कनेक्शन : नेपाल की शाही रानी बनी कांगड़ा की राजपूत राजकुमारी दिव्येश्वरी
विनोद भावुक। धर्मशाला
सन 1875 में कांगड़ा क्षेत्र के एक राजपूत परिवार में जन्मी राजकुमारी दिव्येश्वरी नेपाल के राजघराने की रानी दिव्येश्वरी राज्या लक्ष्मी देवी शाह के रूप में मशहूर हुई। कांगड़ा के एक राजपूत राजघराने से संबंध रखने वाली दिव्येश्वरी का विवाह 1886 में नेपाल के राजा पृथ्वी वीर विक्रम शाह से हुआ।
‘त्रिभुवम बायोग्राफी- नेपाली किंग एंड सन ऑफ दिवेश्वरी’ पुस्तक में रानी दिव्येश्वरी के नेपाल राज परिवार की रानी बनने का किस्सा दर्ज है। कांगड़ा की राजकुमारी दिवेश्वरी की शादी नेपाल के महान नारायणहिटी महल में हुई और वे काठमांडू की सबसे मशहूर रानी बनी। यह महल आगे चलकर नेपाल का सबसे प्रतिष्ठित शाही निवास बना।
पूर्व सांसद कृपाल परमार के पिता की बुआ
पूर्व सांसद कृपाल परमार बताते हैं कि दिव्येश्वरी ज्वालामुखी के धवाला गांव के नजदीकी स्थान शिवनाथ निवासी उनके परदादा मुल्तान सिंह की बेटी और उनके पिता की बुआ थीं। उन्हें उनके दादा विधि चंद ने बताया था कि नेपाल राज परिवार से एक तांत्रिक राजकुमार का रिश्ता लेकर आया था। जब रिश्ता तय हुआ, दिव्येश्वरी की उम्र 10 साल थी और शादी 13 साल की उम्र में होनी थी।
रिश्ता तय होने पर राज परिवार की दो महिला शिक्षिकाएं दो साल तक दिव्येश्वरी के घर पर रह कर उन्हें शाही दरबार के लिए प्रशिक्षित करती रहीं। जब दिव्येश्वरी की शादी हुई तो उनके पूरे परिवार को नेपाल बुलाया गया और एक महल में साल भर उनके ठहरने की व्यवस्था की गई। दिव्येश्वरी रानी ज्वाला के नाम से भी पुकारा जाता था। वे बाद में भी अपने मायके के पक्ष को नेपाल बुलाती रही, लेकिन परिवार का जाना संभव नहीं हो पाया।
राजा की मौत के बाद संभाला राज- पाठ
दिव्येश्वरी ने रानी कंसोर्ट के रूप में 1886 से 1911 तक नेपाल के दरबार में जीवन बिताया। जब राजा पृथ्वी वीर विक्रम शाह का निधन हुआ तो उनके छोटे बेटे त्रिभुवन वीर विक्रम शाह राजा बने। उस समय त्रिभुवन मात्र पांच साल के थे, इसलिए रानी दिव्येश्वरी को रेजेंट (राजप्रतिनिधि) बेटे की ओर से राज्य का संचालन का अवसर मिला।
रानी दिव्येश्वरी ने न सिर्फ राज- पाठ संभाला, बल्कि एक ऐसे पुत्र को जन्म दिया जिसने बाद में नेपाल को राजनीतिक बदलावों की ओर अग्रसर किया। राजा त्रिभुवन ने नेपाल में आधुनिक संवैधानिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजा त्रिभुवन 20वीं सदी में नेपाल के साम्राज्यवादी शासन के समकालीन संदर्भों में इतिहास का बड़ा नाम हैं।
कांगड़ा की रानी के नाम से मशहूर
1933 में रानी दिव्येश्वरी का निधन काठमांडू के नारायणहिटी महल में हुआ। आज भी वे नेपाल के शाही इतिहास में एक भारतीय- कांगड़ा वाली रानी के रूप में याद की जाती है। यहां यह कहना सार्थक है कि कांगड़ा के कई राजपूत परिवारों के नेपाल जैसे पड़ोसी राज्य के साथ ऐतिहासिक और पारिवारिक रिश्ते रहे हैं।
कांगड़ा जिला मुख्यालय धर्मशाला में नेपाली मूल के कई परिवार रहते हैं, जो आज भी नेपाली भाषा में बात करते हैं। धर्मशाला के तोतारानी के मास्टर मित्रसेन थापा नेपाली के प्रतिष्ठित साहित्यकार थे। नेपाल के अनेक शासक भारतीय राजपूत और राणा परिवारों से संबंध रखते थे, जिसने दोनों देशों की संस्कृति और इतिहास को करीब से जोड़ा।
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Jyoti maurya

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