शिमला से शुरू हुआ था ‘हिमालयन जर्नल’: 96 साल से हिमालय अध्ययन और पर्वतारोहण की सबसे विश्वसनीय पत्रिका

शिमला से शुरू हुआ था ‘हिमालयन जर्नल’: 96 साल से हिमालय अध्ययन और पर्वतारोहण की सबसे विश्वसनीय पत्रिका
शिमला से शुरू हुआ था ‘हिमालयन जर्नल’: 96 साल से हिमालय अध्ययन और पर्वतारोहण की सबसे विश्वसनीय पत्रिका
विनोद भावुक। शिमला
हिल क्वीन के नाम से मशहूर शिमला विश्वभर के पर्वतारोहियों और शोधकर्ताओं के लिए ज्ञान और प्रेरणा का केंद्र रहा है। पिछले 96 साल से प्रकाशित हो रहे ‘हिमालयन जर्नल’ की स्थापना शिमला से हुई थी और यह 1929 से हिमालय में होने पर्वतारोहण का दस्तावेज़ीकरण कर रहा है। ‘हिमालयन जर्नल’ संस्थापक और पहले संपादक अंग्रेज भूगोलवेत्ता केनेथ मेसन थे, जो शिमला में सर्वेक्षण कार्यरत थे।
2014 से संपादक की भूमिका निभा रहीं नंदिनी पुरंदरे ‘हिमालयन जर्नल’ की पहली महिला संपादक हैं। उनके सम्पादन में इस वार्षिक पत्रिका को नई दिशा दी है। यह पत्रिका आज भी हिमालय अध्ययन और पर्वतारोहण का सबसे विश्वसनीय स्रोत मानी जाती है। इस पत्रिका ने साहसिक अभियानों, पर्वतीय जीवन और जैव विविधता का दस्तावेजीकरण किया है।
इंग्लैंड से भी हुआ सम्पादन
‘हिमालयन जर्नल’ संपादन कार्य बाद में इंग्लैंड से भी जारी रहा। ‘हिमालयन जर्नल’ हिमालयी क्षेत्रों, पर्वतारोहण अभियानों और प्राकृतिक शोध की जानकारी को वार्षिक पत्रिका के रूप में विश्व समुदाय तक पहुंचा रहा है। केनेथ मेसन 1929 से 1940 तक संस्थापक रहे। इसके अलावा सीडव्लयू नोश, एचडव्लयू टोबिन और ट्रेवर बराहन इस जर्नल के ब्रिटिश संपादक रहे।
1960 से 1968 तक संपादक रहे डॉ के बिस्वास ‘हिमालयन जर्नल’ के पहले भारतीय संपादक बने। भारतीय पर्वतारोहण के पथप्रदर्शक सोली एस मेहता पहले 1969 से 1979 तक और फिर 1987–1989 तक इसके संपादक रहे। हिमालय की विस्तृत खोज और दस्तावेज़ीकरण में योगदान देने वाले मशहूर पर्वतारोही हरीश कपाड़िया पहले 1980 से1986 तक, फिर 1990 से 2014 तक संपादक रहे।
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Jyoti maurya

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