प्रेरक कहानी : कुल्लू के ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क को युनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिलवाकर स्थानीय संरक्षण को वैश्विक समर्थन दिलवाने वाले अमरीकी नागरिक पैसन स्टीवंस

प्रेरक कहानी : कुल्लू के ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क को युनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिलवाकर स्थानीय संरक्षण को वैश्विक समर्थन दिलवाने वाले अमरीकी नागरिक पैसन स्टीवंस
प्रेरक कहानी : कुल्लू के ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क को युनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिलवाकर स्थानीय संरक्षण को वैश्विक समर्थन दिलवाने वाले अमरीकी नागरिक पैसन स्टीवंस
विनोद भावुक। कुल्लू
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू ज़िले में स्थित ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (जीएचएनपी) आज युनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट है। 2014 में जीएचएनपी को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा मिला और हिमाचल प्रदेश का नाम दुनिया के नक़्शे पर और गहराई से उभरा। जीएचएनपी को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा सरकारी प्रक्रिया के साथ अमरीकी नागरिक पैसन आर स्टीवंस के समर्पण का फल है।
साल 2000 में, पैसन स्टीवंस ने जीएचएनपी के तत्कालीन निदेशक संजीव पांडेय से मिलकर ‘फ्रेंड्स ऑफ जीएचएनपी’ नामक ग्रुप बनाया, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिमालय की जैव-विविधता को प्रस्तुत किया और यूनेस्को के लिए वैज्ञानिक और सांस्कृतिक डोज़ियर तैयार कर स्थानीय संरक्षण को वैश्विक समर्थन दिलाया।
माई हिमाचल : सेवा का दूसरा नाम
पैसन स्टीवंस केवल कुल्लू के जंगलों की चिंता तक सीमित नहीं रहे। साल 2006 में वे ‘माई हिमाचल’ संस्था के संस्थापक बोर्ड सलाहकार बने। इस संस्था ने दूरस्थ गांवों की महिलाओं को स्वास्थ्य कार्यकर्ता बनाया, स्वास्थ्य शिविर लगाए और बच्चों के लिए शिक्षा सहायता शुरू की। इसी मानवीय कार्य के लिए
साल 2008 में प्रोजेक्ट कंसर्न इन्टरनेशनल ने उन्हें सम्मानित किया।
पैसन स्टीवंस ने चंडीगढ़ आधारित साहित्यकार, लेखिका कमला कपूर के साथ शादी की है। पैसन स्टीवंस अस्सी साल के हो गए हैं, जबकि कमला कपूर 77 साल की हैं। दोनों वरिष्ठ नागरिक हैं, फिर इस दंपति ने अपने जीवन की कुल्लू घाटी और साइन डियागो के बीच बराबर बाँट रखा है। कुल्लू उनके लिए दूसरे घर जैसा है।
कला का हिमालय, हिमालय की कला
कुल्लू का नग्गर, जहां कभी निकोलस रोरिख ने हिमालय को कैनवास बनाया था, वहीं साल 2006 में रोरीख मेमोरियल म्यूजियम नग्गर में पैसन स्टीवंस के चित्रों की प्रदर्शनी ‘फ्लक्स एंड फलो’ शीर्ष के साथ आयोजित की गई। उनकी चित्रकला में नदियों की ऊर्जा, पहाड़ों की स्थिरता और मानव आत्मा की यात्रा एक साथ बहती दिखाई देती है।
दूरदर्शन ने 2008 में ‘एनर्जी लैंडस्पेप्स- द आर्ट ऑफ पैसन स्टीवंस’ के ज़रिए उनकी कला और उनके हिमालयी जीवन को देशभर तक पहुँचाया। स्पीति के ताबो मठ में अचानक बर्फ़बारी के कारण
दो सप्ताह फंसना उनके लिए अनुभूति का समय बना। उनकी वीडियो कविता ‘अजंता स्माल यूनिवर्स’
पृथ्वी ‘डेटा’ नहीं, जीवित तंत्र
पैसन आर. स्टीवंस, अमेरिका के प्रसिद्ध विज्ञान संप्रेषक, कलाकार, लेखक और पर्यावरण योद्धा, जिनका जीवन और कर्म हिमाचल प्रदेश से गहराई से जुड़ा हुआ है। हिमाचल प्रदेश के लिए पैसन आर. स्टीवंस का संदेश है कि हिमालय पृथ्वी की चेतना का केंद्र है। उन्होंने अपने रंगों, अपनी कविताओं और अपने प्रयासों के जरिये हिमालय के स्थानीय संरक्षण को वैश्विक समर्थन दिलाया है।
29 मार्च 1945 को जन्मे पैसन आर. स्टीवंस ने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी, सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क
और स्क्रिप्स इंस्टीट्यूशन ऑफ ओशनोग्राफी जैसे विश्व-प्रसिद्ध संस्थानों से शिक्षा पाई। वे अर्थ सिस्टम साइन्स और क्लाइमेट चेंज को आम लोगों की भाषा में समझाने वाले अग्रदूतों में माने जाते हैं। नासा से लेकर टेड के मंच तक उन्होंने पृथ्वी को ‘डेटा’ नहीं, जीवित तंत्र के रूप में देखने की दृष्टि दी।
हिमाचल और देश-दुनिया की अपडेट के लिए join करें हिमाचल बिज़नेस
https://himachalbusiness.com/the-national-army-museum-in-london-holds-on-the-spot-photographs-of-kangra-fort-in-its-records-representing-the-most-authentic-british-pictorial-record-of-kangra-fort/

Jyoti maurya

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *