कुल्लू- मंडी की पहाड़ियों में सिख शौर्य का इतिहास, सरदार मंगल सिंह रामगढ़िया का रोल खास, दरबार साहिब और अकाल तख्त के सरबराह हुए नियुक्त

कुल्लू- मंडी की पहाड़ियों में सिख शौर्य का इतिहास, सरदार मंगल सिंह रामगढ़िया का रोल खास, दरबार साहिब और अकाल तख्त के सरबराह हुए नियुक्त
कुल्लू- मंडी की पहाड़ियों में सिख शौर्य का इतिहास, सरदार मंगल सिंह रामगढ़िया का रोल खास, दरबार साहिब और अकाल तख्त के सरबराह हुए नियुक्त
सत्य प्रकाश। मंडी
एक वक्त वह भी था, जब सुकेत रियासत सिख साम्राज्य और उत्तर भारत की राजनीति का एक अहम रणनीतिक केंद्र बन था। 19वीं सदी के मध्य इसी सुकेत के पहाड़ी इलाकों में सरदार मंगल सिंह रामगढ़िया एक ऐसा व्यक्ति सक्रिय था, जो सिख सैन्य इतिहास और धार्मिक प्रशासन दोनों में विशेष स्थान रखता है। वे महान सिख योद्धा जस्सा सिंह रामगढ़िया के परिवार से थे।
1830–40 के दशक में जब सिख साम्राज्य अपनी सैन्य और प्रशासनिक शक्ति के चरम पर था, उस समय मंगल सिंह को सुकेत, मंडी और कुल्लू जैसी पहाड़ी रियासतों में विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गईं, उनका कार्य रियासतों में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना, सामरिक रास्तों, व्यापार मार्गों की सुरक्षा करना और सिख प्रशासन की ओर से स्थानीय निगरानी और समन्वय स्थापित करना था।
पहाड़ों पर सत्ता संतुलन का कठिन दौर
यह वही समय था जब एक ओर सिख साम्राज्य आंतरिक संघर्षों से जूझ रहा था और दूसरी ओर अंग्रेज़ी हुकूमत उत्तर भारत में अपने पांव जमा रही थी। सुकेत, मंडी और कुल्लू जैसे पहाड़ी क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण थे, क्योंकि यहीं से पंजाब, तिब्बत और मध्य हिमालय की कड़ियां जुड़ती थीं और यहीं से होकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग गुजरता था।
मंगल सिंह रामगढ़िया ने इस कठिन दौर में अनुशासन और प्रशासनिक कुशलता के साथ काम किया। सुकेत, मंडी और कुल्लू हर रियासत में उन्होंने सिख प्रशासन को मजबूत किया और शांति और कानून व्यवस्था को कायम रखा। इतिहासकारों के अनुसार, सुकेत क्षेत्र में उनकी तैनाती ने स्थानीय अस्थिरता को काफी हद तक नियंत्रित रखा।
युद्ध से धर्म-प्रशासन तक
पहले और दूसरे एंग्लो-सिख युद्ध के अनुभवी योद्धा रहे मंगल सिंह रामगढ़िया को बाद में अंग्रेज़ों ने दरबार साहिब और अकाल तख्त के सरबराह (1862–1879) नियुक्त किया। जाहिर है कि ब्रिटिश राज भी उनके प्रभाव, प्रतिष्ठा और संतुलित व्यक्तित्व को नज़रअंदाज़ नहीं कर सका। उनका अंतिम समय धर्म की नगरी अमृतसर में बीता।
सिख साम्राज्य, पहाड़ी राजनीति और औपनिवेशिक दबाव के दौर में सुकेत, मंडी और कुल्लू की पहाड़ियों में मंगल सिंह रामगढ़िया ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इतिहास के पन्ने पलटने पर सुकेत में सरदार मंगल सिंह रामगढ़िया जैसे योद्धा-प्रशासक की मौजूदगी इस क्षेत्र को एक अलग ही ऐतिहासिक स्थान बनाती है
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Jyoti maurya

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