बिलासपुर से ब्रिटेन तक: हिमाचल के बेटे डॉ. विजय ठाकुर ने विज्ञान की दुनिया में रचा इतिहास, वैश्विक विज्ञान विमर्श को दिशा दे रहा ‘बिलासपुर का स्टूडेंट’

बिलासपुर से ब्रिटेन तक: हिमाचल के बेटे डॉ. विजय ठाकुर ने विज्ञान की दुनिया में रचा इतिहास, वैश्विक विज्ञान विमर्श को दिशा दे रहा ‘बिलासपुर का स्टूडेंट’
बिलासपुर से ब्रिटेन तक: हिमाचल के बेटे डॉ. विजय ठाकुर ने विज्ञान की दुनिया में रचा इतिहास, वैश्विक विज्ञान विमर्श को दिशा दे रहा ‘बिलासपुर का स्टूडेंट’
विनोद भावुक। बिलासपुर
यह प्रेरक कहानी बिलासपुर के डॉ. विजय कुमार ठाकुर की है, जिनकी यात्रा सरकारी स्कूलों से शुरू हुई और अंतरराष्ट्रीय प्रयोगशालाओं और प्रतिष्ठित वैश्विक मंचों तक जा पहुंची है। उनकी उपलब्धियों के चलते बिलासपुर वैश्विक विज्ञान मानचित्र पर अपनी मज़बूत पहचान दर्ज करा रहा है। 44 साल के डॉ. विजय ठाकुर ब्रिटेन से वैश्विक विज्ञान विमर्श को दिशा दे रहे हैं। उनके नाम ब्रिटिश राष्ट्रमंडल स्कॉलरशिप कमिशन के पहले भारतीय सलाहकार संपादक बनने का रिकॉर्ड है।
बिलासपुर की पहाड़ियों में पले-बढ़े इस स्टूडेंट ने कभी यह नहीं सोचा था कि एक दिन उसका नाम दुनिया के सबसे मशहूर वैज्ञानिकों में शुमार होगा। उनके नाम 300 से अधिक शोध पत्र, 52 किताबें और 2 अंतरराष्ट्रीय पेटेंट हैं। वे कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नलों के एडिटोरियल बोर्ड के सदस्य हैं। डॉ. विजय ठाकुर आज पॉलिमर साइंस, नैनोटेक्नोलॉजी, सस्टेनेबल केमिस्ट्री और मैटेरियल साइंस के क्षेत्र में विश्व स्तर पर पहचाने जाते हैं।
पॉलिमर्स क्षेत्र में दुनिया के सबसे ज़्यादा चर्चित वैज्ञानिक
डॉ. विजय ठाकुर का शोध ऑटोमोबाइल से लेकर एयरोस्पेस, ऊर्जा भंडारण, जल शुद्धिकरण और बायोमेडिकल तकनीकों तक फैला हुआ है। साल 2020 में स्कोपस डेटाबेस की ओर से जारी सूची में डॉ. विजय ठाकुर को पॉलिमर्स क्षेत्र में दुनिया के सबसे ज़्यादा उद्धृत वैज्ञानिकों में 154वां स्थान मिला है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि हिमाचल प्रदेश का एक होनहार बेटा वैश्विक विज्ञान विमर्श को दिशा दे रहा है।
डॉ. विजय ठाकुर नयन टेक्नोलोजिकल यूनिवर्सिटी सिंगापुर, लुंघवा यूनिवर्सिटी ताइवान, क्रैनफील्ड यूनिवर्सिटी यूके और वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी अमेरिका जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम किया, लेकिन वे आज भी खुद को बिलासपुर का स्टूडेंट कहना पसंद करते हैं। ब्रिटिश राष्ट्रमंडल स्कॉलरशिप कमिशन ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मापदंडों पर डॉ. विजय ठाकुर की उपलब्धियों का मूल्यांकन करने के बाद उन्हें सलाहकार संपादक के रूप में चुना।
उम्मीद की किरण ‘विजय’ होने की कहानी
यह कहानी लाखों हिमाचली स्टूडेंट्स के लिए उम्मीद की किरण है, जो संसाधनों की कमी के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। 17 दिसंबर 1981 को हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर ज़िले में जन्मे विजय ठाकुर की शुरुआती शिक्षा पूरी तरह सरकारी संस्थानों में हुई। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से बीएससी, बीएड और एमएससी (ऑर्गेनिक केमिस्ट्री), एनआईटी हमीरपुर से पीएचडी और फिर आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी, अमेरिका पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्च की है।
प्रतिभा के दम पर फर्श से अर्श छूने की यह प्रेरक जर्नी सबूत है कि अगर नींव मज़बूत हो, तो पहाड़ों से भी अंतरिक्ष तक पहुंचा जा सकता है। डॉ. विजय ठाकुर की सफलता हिमाचल प्रदेश के युवाओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि सीमित संसाधन बाधा नहीं, सरकारी संस्थान कमजोरी नहीं है और कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। आज जब विज्ञान और तकनीक भारत के भविष्य की रीढ़ बन रही है, ऐसे में डॉ. ठाकुर जैसे वैज्ञानिक विकसित भारत की असली ताकत हैं।
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Jyoti maurya

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