इतिहास और विचार के लिए समर्पित एक तपस्वी की प्रेरकगाथा, उम्र भर ‘सच्चे इतिहास’ की खोज में रहे ठाकुर राम सिंह, नेरी में की रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना
इतिहास और विचार के लिए समर्पित एक तपस्वी की प्रेरकगाथा, उम्र भर ‘सच्चे इतिहास’ की खोज में रहे ठाकुर राम सिंह, नेरी में की रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना
अजय शर्मा। हमीरपुर
यह प्रेरक कहानी है हमीरपुर के स्वर्गीय ठाकुर राम सिंह की, जो कहते थे कि ‘व्यक्ति नहीं, विचार बड़ा होता है। यह किसी साधारण व्यक्ति की कहानी नहीं, उम्र भर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे राष्ट्र, इतिहास और विचार के लिए समर्पित एक तपस्वी की गाथा है। उम्र भर ‘सच्चे इतिहास’ की खोज में रहे ठाकुर राम सिंह के प्रयास से ही हमीरपुर के नेरी में की रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना हुई।
हमीरपुर जिले के झंडवी गांव में 16 फरवरी 1915 को जन्मे ठाकुर राम सिंह ने लाहौर के एफ़.सी. कॉलेज से इतिहास एम.ए की। 1942 में कॉलेज टॉपर रहे और उन्हें स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। कॉलेज प्राचार्य ने लेक्चररशिप की पेशकश की, लेकिन उन्होंने वह रास्ता चुना जो आसान नहीं था। उन्होंने नौकरी ठुकराई और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक बन गए।
22 साल असम प्रांत में प्रचार की ज़िम्मेदारी
1942 में ठाकुर राम सिंह को प्रचारक बनाकर कांगड़ा जिले में भेजा गया, फिर अमृतसर विभाग, पंजाब, और साल 1949 में गुरुजी एम.एस. गोलवलकर के मार्गदर्शन में उन्हें असम प्रांत की ज़िम्मेदारी दी गई।
उन्होंने 1949 से 1971 तक लगातार 22 वर्षों तक बिना किसी प्रचार और किसी पद-लालसा के असम और पूर्वोत्तर भारत में संगठन को खड़ा करने में खास भूमिका निभाई।
1988 में उन्हें अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना का नेतृत्व सौंपा गया। वरिष्ठ प्रचारक मोरोपंत पिंगले के मार्गदर्शन में उन्होंने इतिहास को किताबों से निकालकर जन-चेतना का विषय बनाया। साल 1992 में आंध्र प्रदेश के वारंगल में सर्वसम्मति से इस योजना के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए और दिल्ली से पूरे देश में कार्य का विस्तार किया। उन्होंने सैकड़ों इतिहासकार, विद्वान और शोधकर्ता जोड़े।
शोध संस्थान और राष्ट्रीय सेमिनार
ठाकुर राम सिंह की प्रेरणा से हमीरपुर के नेरी में ठाकुर जगदेवचंद मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना हुई, जिसके वे संस्थापक संरक्षक रहे। उन्होंने वैवस्वत मन्वंतर, भारतीय सामाजिक व्यवस्था, सिकंदर का भारत अभियान, डोगरा वीरों द्वारा सिकंदर का अंत, महाराजा संसार चंद जैसे इतिहास के विषयों पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित करवाए।
95 साल की उम्र में ठाकुर राम सिंह ने अगस्त 2010 में 197 करोड़ की इतिहास लेखन परियोजना कार्यक्रम में भाग लिया। जीवन के अंतिम क्षण तक इतिहास परियोजना के लिए समर्पित रहे। अस्पताल में रहते हुए भी भारतीय पंचांग से जुड़े रहे और तथ्य लिखकर भेजे। 6 सितंबर 2010 को इतिहास का यह बड़ा साधक स्वयं इतिहास में अमर हो गया।
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