स्वास्थ्य की देख-भाल के साथ इतिहास की संभाल, मंडी के चिकित्सक डॉ. चमन लाल मल्होत्रा ने इतिहास लेखन में दिया योगदान

स्वास्थ्य की देख-भाल के साथ इतिहास की संभाल, मंडी के चिकित्सक डॉ. चमन लाल मल्होत्रा ने इतिहास लेखन में दिया योगदान
स्वास्थ्य की देख-भाल के साथ इतिहास की संभाल, मंडी के चिकित्सक डॉ. चमन लाल मल्होत्रा ने इतिहास लेखन में दिया योगदान
सत्य प्रकाश। मंडी
मंडी शहर के स्वर्गीय डॉ. चमन लाल मल्होत्रा हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित नाम हैं। हेम चंद मल्होत्रा के पुत्र डॉ. चमन लाल मल्होत्रा ने एमबीबीएस में गोल्ड मैडल हासिल किया और सर्जरी में मास्टर डिग्री ली। चमन लाल मल्होत्रा ने लंबे समय तक हिमाचल प्रदेश के डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज,के रूप में सेवाएँ दी। इस पद पर कार्य करने वाले सबसे अनुभवी पेशेवरों में शामिल रहे।
डॉ. मल्होत्रा ने न केवल सर्जरी में महत्वपूर्ण योगदान दिया, बल्कि प्रशासन में उत्कृष्ट योगदान दिया।उन्होंने राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ किया और लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को सुगम बनाया। उनका काम सिर्फ चिकित्सकीय तक सीमित नहीं था; उन्होंने समाज और स्वास्थ्य जागरूकता के लिए कई पहल की।
विजय हाई स्कूल से दरभंगा मेडिकल कॉलेज तक
29 मई 1935 को पैदा हुए डॉ. चमन लाल मल्होत्रा ने विजय हाई स्कूल से दसवीं, बल्लभ कॉलेज मंडी से एफएससी, होशियारपुर से बीएससी और दरभंगा मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस पदक और एमएस किया। सर्जन के तौर पर अपने करियर की शुरुआत करने वाले डॉ. मल्होत्रा मंडी शहर के एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व निदेशक हेल्थ के रूप प्रदेश में सबसे लंबे समय तक सेवा देने का रिकॉर्ड उनके नाम है।
चिकित्सा में करियर के अलावा, उन्हें मंडी और हिमाचल प्रदेश के इतिहास पर किताबें लिखने का शौक था। उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘हिमाचल का क्रांतिकारी इतिहास’ और ‘देवलोक के देवता’ शामिल हैं। जनवरी 2018 में डॉ. सीएल मल्होत्रा का निधन हो गया, लेकिन आज भी वे एक कुशल सर्जन के साथ-साथ एक समर्पित प्रशासक और इतिहासकार के रूप में भी याद किए जाते हैं।
सर्जन जो बन गया इतिहासकार
मंडी और हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक तथ्य डॉ. मल्होत्रा के अध्ययन का केंद्र थे। हिमाचल के संघर्षों और क्रांतिकारी घटनाओं के दस्तावेज़ के तौर उन्होंने ‘हिमाचल का क्रांतिकारी इतिहास’ लिखा। इसी तरह हिमाचल प्रदेश की लोकधाराओं, देवी-देवताओं और सांस्कृतिक मान्यताओं के अध्ययन पर आधारित ‘देवलोक के देवता’ का लेखन किया।
डॉ. मल्होत्रा ने साबित किया कि एक पेशेवर चिकित्सक केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं रहता, वह समाज और संस्कृति के प्रति भी जिम्मेदारी निभा सकता है। डॉ. मल्होत्रा का जीवन यह दिखाता है कि ज्ञान, सेवा और संस्कृति का संगम किसी भी व्यक्ति को बहुआयामी बनाता है। उनकी किताबें और शोध इतिहास प्रेमियों के लिए एक अमूल्य धरोहर हैं।
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Jyoti maurya

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