परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम थीं सिबा रियासत की अंतिम महारानी उषा देवी
परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम थीं सिबा रियासत की अंतिम महारानी उषा देवी
ज्योति मोर्या। कांगड़ा
ऐतिहासिक सिबा रियासत का नाम आते ही राजसी गौरव, चट्टानों सी मजबूती, और संस्कृति के साथ बंधा इतिहास याद आता है। इसी गौरवशाली परंपरा की एक अनुपम छवि थीं रानी उषा देवी, सिबा के अंतिम शासक राजा हरमहिंदर सिंह की पहली पत्नी उषा देवी एक एक शालीन, संवेदनशील और सम्मानित शाही महिला थीं।
रानी उषा देवी का जन्म 25 अक्टूबर 1919 को प्रतिष्ठित पंजाबी रियासत कपूरथला के शाही परिवार में हुआ। वे ऐसे परिवार में जन्मी थीं, जिसका इतिहास राजस्थान-पंजाब की शाही परंपराओं से गहरा जुड़ा थी। वे महाराज कुमार महिजीत सिंह और अनार देवी की सुपुत्री थीं। रियासत के संस्कार, आत्मविश्वास और पारिवारिक मर्यादा ने एक सशक्त, आत्मनिर्भर और सभ्य महिला के रूप में आकार दिया।
कपूरथला की शाही परंपरा, सिबा की राजसत्ता
24 अप्रैल 1945 को रानी उषा देवी का विवाह सिबा रियासत के 31वें शासक राजा हरमहिंदर सिंह से संपन्न हुआ। राजा हरमहिंदर सिंह का जन्म 1922 में हुआ था। वे दशकों तक राज्य की सेवा और नेतृत्व करने वाले एक युग पुरुष थे और 1932 से 2000 तक सिबा रियासत के शासक रहे। इस विवाह ने कपूरथला की शाही परंपरा और सिबा की राजसत्ता के गौरव को भी एक साथ बंधा दिया।
राजा हरमहिंदर सिंह और रानी उषा देवी के पुत्र टिक्का बृजेंद्र सिंह ने सिबा रियासत की परंपरा और वंश के निरन्तरता को आगे बढ़ाया। आजादी के बाद शाही रियासतों का भारत में विलय हुआ। ऐसे बदलावों के बीच रानी उषा देवी का जीवन एक शाही महारानी से एक गरिमामयी और सम्मानित नागरिक तक रूपांतरित हुआ।
शाही गौरव के साथ विनम्रता का मेल
रानी उषा देवी का निधन उस युग का अंत भी था, जिस समय का जब शाही परंपराएँ इतिहास की इकाइयाँ बनकर आधुनिक भारत के साथ मिलती जा रही थीं। रानी उषा देवी परंपरा और आधुनिकता का संगम थीं, जो गर्व, सम्मान और परिवार के प्रति समर्पित रहीं। शाही गौरव के साथ विनम्रता के मेल वाली महारानी संस्कारों, जिम्मेदारियों और बदलते भारत की प्रतीक थीं।
हिमाचल और देश-दुनिया की अपडेट के लिए join करें हिमाचल बिज़नेस
https://himachalbusiness.com/100-years-ago-bhai-dhanna-singh-patialvi-traveled-by-bicycle-and-captured-on-camera-the-places-in-kangra-kullu-and-bilaspur-that-are-associated-with-the-sikh-gurus/
