कभी मुख्यमंत्री धूमल की गाड़ी के आगे खड़े हो गए थे प्रधानमंत्री मोदी के सलाहकार, ‘सोलर मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर, शिमला के लॉन्गवुड के तरुण कपूर

कभी मुख्यमंत्री धूमल की गाड़ी के आगे खड़े हो गए थे प्रधानमंत्री मोदी के सलाहकार, ‘सोलर मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर, शिमला के लॉन्गवुड के तरुण कपूर
कभी मुख्यमंत्री धूमल की गाड़ी के आगे खड़े हो गए थे प्रधानमंत्री मोदी के सलाहकार, ‘सोलर मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर, शिमला के लॉन्गवुड के तरुण कपूर
विनोद भावुक। शिमला
प्रेम कुमार धूमल 1998 में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। कश्मीर से चंबा जिले में घुसे आतंकियों ने कालावन- सतरुंडी में 35 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी। माहौल बेहद तनावपूर्ण था, लेकिन मुख्यमंत्री मौके पर जाना चाहते थे। तभी चंबा के तत्कालीन उपायुक्त तेज़ी से आगे आए और मुख्यमंत्री की गाड़ी के सामने खड़े हो गए।
उन्होंने मुख्यमंत्री को रोका और कहा कि अभी जाना जोखिम भरा है। मुमकिन है आतंकी आसपास छिपे हों। यह एक अधिकारी की अपने मुख्यमंत्री और प्रदेश के प्रति जिम्मेदारी थी। बाद में पूरी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के बाद ही उपायुक्त ने दौरे की अनुमति दी। तत्कालीन उपायुक्त चंबा तरुण कपूर वर्तमान में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सलाहकार हैं।
स्कूली पढ़ाई के लिए घूम लिए आधा हिमाचल
23 नवंबर 1961 को शिमला के लॉन्गवुड में पैदा हुये तरुण कपूर की स्कूली शिक्षा सेंट्रल स्कूल मंडी, पालमपुर, योल और शिमला से हुई। इन्हीं सालों में एक पहाड़ी किशोर ने अनुशासन और सार्वजनिक सेवा का अर्थ सीखा। विभिन्न इलाकों का सामाजिक वातावरण उनके व्यक्तित्व में ऊर्जा, संवेदनशीलता और व्यावहारिकता भरता चला गया, जो उनके प्रशासनिक फैसलों में साफ झलका।
उनके पिता बिजली विभाग में रहे, जिससे ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी समझ बचपन से ही विकसित हुई। दिल्ली विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की पढ़ाई करने के पीछे भी कहीं न कहीं घर से मिली समझ ही बड़ा कारण बनी। यही कारण है कि आगे चलकर वे ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ प्रशासक के रूप में पहचाने गए।
सोलर मैन ऑफ इंडिया का टैग
तरुण कपूर ने केंद्र सरकार में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव रहते हुए और इससे पहले नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने का ठोस ब्लू प्रिंट तैयार किया। प्रधानमंत्री की स्वच्छ ऊर्जा की सोच को जमीन पर उतारने में उनकी भूमिका इतनी प्रभावी रही कि उन्हें साथी अधिकारी उन्हें ‘सोलर मैन’ कहने लगे।
उनकी अध्यक्षता में बनी एनर्जी ट्रांसमिशन एडवाइजरी कमेटी ने हाइड्रोजन, बायो-फ्यूल जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा तय की, जो आने वाले दशकों की भारत की ऊर्जा नीति की रीढ़ मानी जा रही है। यह उनकी प्रतिभा का ही कमाल है कि दूसरी बार उन्हें देश के प्रधानमंत्री ने अपने सलाहकार के तौर पर चुना है।
स्थिर, सधे हुए निर्भीक अफसर
हिमाचल सरकार में रहते हुए तरुण कपूर ने शिमला और चंबा के उपायुक्त, पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास निदेशक, ऊर्जा निदेशक, हिमाचल पावर कॉर्पोरेशन और ट्रांसमिशन निगम के एमडी, पांगी में आवासीय आयुक्त जैसे दायित्व संभाले। लोक निर्माण, वन एवं पर्यावरण, खाद्य एवं आपूर्ति, आबकारी एवं कराधान में उन्होंने सचिव/प्रधान सचिव के रूप में सेवाएं दीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल मानते हैं कि तरुण कपूर जैसे अधिकारी ही नीति को मानवता से जोड़ते हैं। उनकी नजर में तरुण कपूर स्थिर, सधे हुए और निर्भीक अफसर हैं। वे योजना बनाने, ड्राफ्टिंग करने और उन्हें ज़मीन पर उतारने में असाधारण रूप से सक्षम अधिकारी हैं। उनकी सोच स्थिर है और फैसले सीधे जनता के हित में होते हैं।
पहाड़ की प्रतिभा का सार्वजनिक अभिनंदन
हिमाचल प्रदेश में विभिन्न पदों पर रहते हुए उन्होंने पहाड़ी इलाकों की भौगोलिक चुनौतियों, ग्रामीण जरूरतों और ऊर्जा-संरचना को करीब से समझा। तरुण कपूर को दूसरी बार प्रधानमंत्री का सलाहकार बनाया जाना प्रदेश के लिए केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं, पहाड़ की प्रतिभा की राष्ट्रीय पहचान का सार्वजनिक अभिनंदन है।
जब वे दूसरी बार प्रधानमंत्री कार्यालय में सलाहकार बने हैं और हिमाचल प्रदेश की प्रशासनिक सोच राष्ट्रीय नीति को दिशा दे रही है, तो प्रेम कुमार धूमल का वर्षों पुराना आकलन प्रासंगिक लगता है। तरुण कपूर ने साबित किया कि अगर सोच बड़ी हो तो छोटे शहर, पहाड़ी स्कूल और सीमित संसाधनों के बावजूद राष्ट्रीय नीति तक पहुंचना संभव है।
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Jyoti maurya

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