विदेशी महिला यात्री की अमेरिका से छ्पी ‘ट्री ऑफ लाइफ’ के कवर पर कुल्लू के वशिष्ठ गांव की पचास साल पुरानी मनमोहक तस्वीर

विदेशी महिला यात्री की अमेरिका से छ्पी ‘ट्री ऑफ लाइफ’ के कवर पर कुल्लू के वशिष्ठ गांव की पचास साल पुरानी मनमोहक तस्वीर
विदेशी महिला यात्री की अमेरिका से छ्पी ‘ट्री ऑफ लाइफ’ के कवर पर कुल्लू के वशिष्ठ गांव की पचास साल पुरानी मनमोहक तस्वीर
हिमाचल बिजनेस स्पेशल। मनाली
अमेरिका के हेव्स एंड जेंकिन पब्लिशर हाउस से प्रकाशित विदेशी महिला यात्री टेरेसा मेजर की पुस्तक ‘ट्री ऑफ लाइफ- टेल्स ऑफ ए ट्रेवलिंग वुमन इन इंडिया 1971-1974 एंड 1979-1983’ के कवर पर कुल्लू के वशिष्ठ गांव की पचास साल पुरानी मनमोहक तस्वीर को स्थान मिला है। पुस्तक उस दौर के कुल्लू सैर कराती है, जब यात्रा रोमांच थी और हर मुलाकात एक कहानी बन जाती थी।
पुस्तक के कवर पर छापे फोटो में बर्फ से ढकी चोटियों के बीच लकड़ी-पत्थर का पारंपरिक घर। यह दृश्य गांव की सुंदरता संग उस दौर के ग्रामीण जीवन की सादगी भी दर्शाता है। लेखिका ने लेखिका ने अपने मित्र पीटर वोलेज की खींची इस तस्वीर को कवर के लिए चुना और पुस्तक जैकेट के डिज़ाइन में भी सहयोग लिया, जो इसे और भी व्यक्तिगत और खास बनाता है।
गोवा से कुल्लू घाटी तक का सफर
यह पुस्तक 1970 के दशक में भारत में बिताए गए लेखिका के अनुभवों का संग्रह है। गोवा के समुद्री किनारों से लेकर कुल्लू घाटी के वशिष्ठ गाँव की पहाड़ियों तक, हर अध्याय में उनके संस्मरण, सांस्कृतिक टकराव, दोस्ती, संघर्ष और आत्मखोज की कहानियाँ हैं। यह विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद, कठिनाइयों में सुंदरता की खोज और यात्रा से भीतर से बदलाव की यात्रा है।
पुस्तक सिर्फ यात्रा-वृत्तांत नहीं है; यह एक महिला की आत्मिक यात्रा भी है। उस समय जब अकेली विदेशी महिला का भारत भ्रमण असामान्य माना जाता था, तब उन्होंने न केवल यात्राएं कीं, बल्कि स्थानीय लोगों के साथ घुल-मिलकर जीवन को करीब से जिया। खासकर कुल्लू के छोटे से गांव का छोटा सा पहाड़ी गांव इस पुस्तक की आत्मा है।
अतीत की गलियां, हर पन्ना एक नई खोज
भारत की मिट्टी, पहाड़ों की खुशबू और 70 के दशक की यात्राओं की जीवंत स्मृतियों को समेटे यह पुस्तक ग्लोबल साहित्य प्रेमियों के बीच चर्चित हो रही है। 70 के दशक के भारत की झलक पाने के लिए
हिमाचल प्रदेश और गोवा की सांस्कृतिक विविधता समझने के लिए टेरेसा मेजर की इन कहानियों को पढ़ना ही नहीं, इनमें गहरे उतरना पड़ेगा।
एक साहसी विदेशी घुमक्कड़ महिला की आत्मखोज की यात्रा से प्रेरणा लेने के लिए यह पुस्तक पढ़नी चाहिए। वे उम्मीद और आस्था की लेखिका हैं और मुश्किलों में मुस्कराने का हुनर सिखाती हैं। पुस्तक अब Amazon पर उपलब्ध है। यह पुस्तका पाठकों के लिए एक ऐसा अनुभव है, जो उन्हें आधी सदी पुरानी अतीत की गलियों में ले जाता है, जहाँ हर पन्ना एक नई खोज है।
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Jyoti maurya

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