1857 के विद्रोह के दौरान ब्रिटिश आर्मी के लिए ‘रिकवरी स्टेशन’ बन गया था शिमला, देश भर के घायल सैनिकों का हुआ उपचार विनोद भावुक। शिमला

1857 के विद्रोह के दौरान ब्रिटिश आर्मी के लिए ‘रिकवरी स्टेशन’ बन गया था शिमला, देश भर के घायल सैनिकों का हुआ उपचार विनोद भावुक। शिमला
1857 के विद्रोह के दौरान ब्रिटिश आर्मी के लिए ‘रिकवरी स्टेशन’ बन गया था शिमला, देश भर के घायल सैनिकों का हुआ उपचार
विनोद भावुक। शिमला
भारत के इतिहास में सन 1857 इसलिए खास है, क्योंकि उस साल अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की चिंगारियां पूरे देश में भड़क उठीं थीं। मैदानों में तोपें गरज रही थीं और दिल्ली घेराबंदी का केंद्र बन चुकी थी। विद्रोह की खबर जब शिमला तक पहुंची, तो यहां तैनात ब्रिटिश सैन्य अधिकारी व सैनिक तुरंत दिल्ली की ओर कूच कर गए।
उस दौरान शिमला ने देश भर के घायल सैनिकों की शरणस्थली के रूप में ब्रिटिश आर्मी के लिए ‘रिकवरी स्टेशन’ की भूमिका निभाई। ब्रिटिश सैन्य अधिकारी Captain George Franklin Atkinson ने अपनी पुस्तक ‘The Campaign in India 1857-1859’ में ‘Wounded Officers at Simla, 1857’ कैप्शन के साथ एक मार्मिक दृश्य उकेरा है, जो इस बात की पुष्टि करता है।
शिमला ने घायल सैनिकों को दिया नया जीवन
यह चित्र केवल कला नहीं, बल्कि उस दौर के शिमला के इतिहास की जीवंत झलक है। जॉर्ज फ्रेंकलिन एटकिंसन पुस्तक में लिखते हैं कि उस दौर में शिमला (सिमला) ब्रिटिश अधिकारियों के लिए एक हिल स्टेशन था। शीतल जलवायु, तपती मैदानी गर्मी से कहीं अधिक अनुकूल थी। दिल्ली की घेराबंदी के बाद अनेक ब्रिटिश सैनिक महीनों तक शिमला में उपचार लेते रहे।
उस समय शिमला में आज के आधुनिक अस्पतालों की तरह सुविधाएँ नहीं थीं, लेकिन शिमला की प्राकृतिक ठंडक, देवदारों की खुशबू और शांत वातावरण ने कई घायल ब्रिटिश सैनिकों को नया जीवन दिया। पुस्तक बताती है कि ब्रिटिश आर्मी के लिए शिमला एक रिकवरी स्टेशन जैसा बन गया था। शिमला केवल विश्राम स्थल नहीं था, यह उम्मीद का स्थान था।
ग्रीष्मकालीन राजधानी की भूमिका में शिमला
एटकिंसन के चित्र में घायल ब्रिटिश अधिकारी दिखाई दे रहे हैं। किसी के हाथ पर पट्टी, किसी के सिर पर पट्टियाँ बंधी हैं। पीछे शांत पहाड़ी वातावरण दिखाई दे रहा है। यह विरोधाभास बताता है कि मैदानों में युद्ध की आग भड़क रही है और पहाड़ों पर जीवन को फिर से संवारने की कोशिश हो रही है। प्रकृति सबसे बड़ी चिकित्सक बन जाती है और युद्ध के बीच भी मानवता की आवश्यकता बनी रहती है।
जाहिर है कि उस दौर में शिमला भविष्य की भूमिका भी निभा रहा था। 1858 में भारत सरकार अधिनियम पारित हुआ और भारत का प्रशासन सीधे अंग्रेजों के हाथ आ गया। शिमला की अहमियत बढ़ने लगी और 1864 में शिमला ब्रिटिश भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी बन गया। बाद में शिमला से बड़े प्रशासनिक निर्णय लिए जाने लगे।
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Jyoti maurya

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