अफगानिस्तान का पठान और रघुनाथपुरा के मियां बदन सिंह का शक्ति प्रदर्शन, कहलूर राजदरबार में चांदी के सिक्के का मशहूर किस्सा
अफगानिस्तान का पठान और रघुनाथपुरा के मियां बदन सिंह का शक्ति प्रदर्शन, कहलूर राजदरबार में चांदी के सिक्के का मशहूर किस्सा
हिमाचल बिजनेस स्पेशल। बिलासपुर
राजा अमरचंद के समय एक बार कहलूर रियासत में अफगानिस्तान से कोई पठान आया। पठान इतना ताकतवर था कि उसने राजा के दरबार में हाजिर होकर चांदी का एक सिक्का अपने हाथ में लेकर उसे मोड़ दिया। उसने यह सिक्का इस चुनौती के साथ दरबार की तरफ उछला कि कोई इसे सीधा कर दिखाए। रघुनाथपुर के मियां बदन सिंह उठे। उन्होंने उस मुड़े हुये सिक्के को सीधा कर दिया।
अब बारी मियां बदन सिंह के हुनर की थी। उन्होंने उस सिक्के को दूसरी तरफ मोड़ दिया और पठान को कहा कि अब तुम इसे खोल कर दिखाओ। पठान ने बहुत जोर लगाया, लेकिन वह उस मियां बदन सिंह के मोड़े हुए सिक्के को सीखा नहीं कर सका। कहानी कलहूर रियासत के उन्हीं मियां बदन सिंह की, जिन्हें अंग्रेजों ने रायबहादुर का खिताब दिया था।
एक वार से काट दी जंगली सूअर की गर्दन
सिरमौर के राजा को बिलासपुर की सेना की जरूरत पड़ी तो मियां बदन सिंह कहलूर से सेना की एक टुकड़ी लेकर सिरमौर गए। वापसी पर वे पिंजौर के जंगल से गुजर रहे थे। जंगल में पटियाला का राजा शिकार खेलने आया था। शिकारियों ने एक जंगली सूअर को घेर रखा था। सूअर को बड़ी मुश्किल से घेरा गया था, इसलिए राजा के कारिंदों ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया।
कारिंदों ने हिदायत दी कि अगर सूअर भागा तो गलती कहलूर वालों की मानी जाएगी और उन्हें दंड भुगतना होगा। अचानक सूअर एक तरफ को भागने लगा तो मियां बदन सिंह ने बिजली की फुर्ती से तलवार से सूअर की गर्दन को अलग करके उसे पटियाला के राजा को भेंट किया। उनकी अदा पर खुश होकर पटियाला के राजा ने कलहूर के राजा से हर संभव मदद के लिए संधि की थी।
विजय चंद बने राजा, मियां ‘राय बहादुर’
राजा अमरचंद की मृत्यु के वक्त विजय चंद की उम्र 16 साल के लगभग थी, इसलिए अंग्रेज सरकार ने मियां बदन सिंह की अध्यक्षता में राजकाज चलाने वाली एक काउंसिल का गठन किया था। प्रशासनिक कार्य में कुशलता के चलते विजय चंद की जब राजा के तौर पर ताजपोशी हुई तो मियां बदन सिंह को अंग्रेज सरकार ने राय बहादुर की उपाधि से सुशोभित किया।
कभी कहलूर रंगमहल की तर्ज पर रघुनाथपुरा में भी एक तीन मंजिला छोटा महल बना हुआ था। असल जिंदगी में मियां एक धार्मिक प्रवृत्ति वाले व्यक्ति थे। वह दुर्गा के उपासक थे। घंटों मां भवानी की पूजा किया करते थे और मां दुर्गा के ध्यान में बैठे रहते थे। जीवन की साँझ में वे पूरी तरह से आध्यात्मिक हो चुके थे। वह सफेद धोती अचकन पहनते थे और सफेद ही पगड़ी लगाते थे।
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