डेडलाइन्स के पीछे छिपी ज़िंदगी: तीन दशकों की सच्ची कहानियों का संग्रह, शिमला की वरिष्ठ पत्रकार अर्चना फुल्ल की पुस्तक ‘Life in Deadlines’
डेडलाइन्स के पीछे छिपी ज़िंदगी: तीन दशकों की सच्ची कहानियों का संग्रह, शिमला की वरिष्ठ पत्रकार अर्चना फुल्ल की पुस्तक ‘Life in Deadlines’
हिमाचल बिजनेस। शिमला
तीन दशकों तक खबरों की दुनिया में डेडलाइन्स का पीछा करते हुए जो अनुभव, सीख और संवेदनाएं एक पत्रकार के मन में जमा होती हैं, नई पुस्तक ‘Life in Deadlines’ उन्हीं का सजीव दस्तावेज़ है। यह पुस्तक छोटे-छोटे, लेकिन गहरे असर छोड़ने वाले वास्तविक प्रसंगों का संग्रह है, जो बताती है कि तेज़ रफ्तार पेशेवर जीवन के बीच भी मानवीय मूल्यों को कैसे जिया जा सकता है।
मूल रूप से कांगड़ा से संबंध रखने वाली शिमला की वरिष्ठ पत्रकार अर्चना फुल्ल की यह दूसरी पुस्तक है। दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्था इन्द्रप्रस्थ प्रकाशन ने इस पुस्तक को प्रकाशित किया है, जिसने पत्रकारिता जगत और पाठकों के बीच विशेष उत्सुकता पैदा की है। पुस्तक के प्रकाशित होने की सूचना लेखिका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर साझा की है।
डेडलाइन के पीछे की असली कहानी
लेखिका का कहना है कि पत्रकारिता एक ऐसा क्षेत्र है, जहां हर दिन समय से दौड़ होती है। रिपोर्टिंग, संपादन, फील्ड विज़िट, प्रतिस्पर्धा और दबाव के बीच जीवन की छोटी-छोटी सीख अक्सर अनदेखी रह जाती है। ‘Life in Deadlines’ इन्हीं अनदेखी सीखों को सामने लाती है। बतौर अर्चना फुल्ल, पुस्तक की हर कहानी वास्तविक है और किसी न किसी जीवन-संदेश को संप्रेषित करती है।
घर में रोज़मर्रा की सीख, समाज में बदलते रिश्ते, पेशेवर जीवन की चुनौतियाँ और आत्ममंथन के पल, इस पुस्तक के हर प्रसंग रोचक, मनोरंजक और ज्ञानवर्धक बना है। लेखिका का मानना है कि कई बार सबसे बड़ी सीख वही होती है, जिसे हम सामान्य समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। पत्रकारिता तीन दशकों का वास्तविक अनुभव पुस्तक में बखूबी झलकता है।
गुरु को समर्पित भावपूर्ण श्रद्धांजलि
इस पुस्तक को लेखिका ने अपने मार्गदर्शक और पत्रकारिता शिक्षक स्वर्गीय वेपा राव को समर्पित किया है। किताब में शामिल एक विशेष कहानी ‘Touch of a Guru’ उनकी स्मृति को समर्पित है। यह कहानी केवल एक शिक्षक की नहीं, बल्कि उस जीवन-दर्शन की है, जो कक्षा की चारदीवारी से कहीं आगे जाकर विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को आकार देता है।
इन्द्रप्रस्थ प्रकाशन ने पिछले वर्ष अर्चना फुल्ल की पुस्तक ‘The Flame Inside’ भी प्रकाशित की थी, जिसे पाठकों ने खूब सराहा था। ‘Life in Deadlines’ को उस यात्रा का अगला पड़ाव माना जा रहा है, जहां व्यक्तिगत अनुभव, पेशेवर संघर्ष और मानवीय संवेदनाएँ एक साथ मिलती हैं। यह पुस्तक केवल पत्रकारों के लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है जो जीवन की दौड़ में व्यस्त है।
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