कुश्ती के हर फन में माहिर पहलवान, कांगड़ा के मशहूर साधु की पहचान, बाबा कयालू जी महाराज और गंगथ के महादंगल की अद्भुतकथा
कुश्ती के हर फन में माहिर पहलवान, कांगड़ा के मशहूर साधु की पहचान, बाबा कयालू जी महाराज और गंगथ के महादंगल की अद्भुतकथा
संतोष शर्मा। गंगथ
कांगड़ा में एक ऐसा साधु-संत हुआ, जिसकी कथाएँ जनपद के गाँव-मौहल्ले में पीढ़ियों से सुनाई जाती आ रही हैं। संत बाबा कयालू जी महाराज की जीवनगाथा साधना, शक्ति, खेल और भक्ति का अनोखा मिश्रण प्रस्तुत करती है। कांगड़ा जनपद में गंगथ एक ऐतिहासिक कस्बा है। बताया जाता है कि कुश्ती के माहिर पहलवान कयालू ही कालांतर में साधु बन गए थे।
बाबा कयालू जी महाराज के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने साधना और शरीरिक अभ्यास को एक साथ अपनाया। कुश्ती को ही योग का समावेश समझा। यही कारण है कि उनके अनुयायियों ने उन्हें वर्चस्व और भक्ति के संत के रूप में पूजा। हर साल गंगथ का मशहूर महादंगल पहलवान से संत हुए बाबा कयालू जी महाराज के सम्मान में आयोजित किया जाता है।
संत पहलवान की याद में दंगल
कहा जाता है कि बाबा कयालू जी की शक्ति न केवल भौतिक थी, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी उन्हें विशेष माना जाता था। उनके जीवन के बारे में लिखित दस्तावेज नहीं हैं, लेकिन मौखिक परंपराओं में उनकी गरिमा आज भी मौजूद है। बाबा कयालू जी महाराज के नाम से जुड़ी सबसे रोचक परंपरा है बाबा कयालू दंगल। स्थानीय लोगों की ओर से वार्षिक कुश्ती मेले का आयोजन।
बाबा कयालू जी महाराज प्रतिष्ठित पहलवान संत थे। वे भक्ति बल्कि शक्ति, अभ्यास और दृढ़ता का प्रतीक माने जाते हैं और उनकी परंपरा आज भी ग्रामीण लोक जीवन और संस्कृति में जीवित है। देवभूमि की लोक-संस्कृति में साधु केवल केवल पारंपरिक तपस्वी नहीं होते, वे समाज के सशक्त प्रेरक, खेल-बुद्धि और आत्मिक अनुशासन के पर्याय भी बन जाते हैं।
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