जर्मनी में अंतरराष्ट्रीय नीलामी में प्रदर्शित हुआ 250 साल पुराना जसवां के राजा का शाही पोर्ट्रेट
जर्मनी में अंतरराष्ट्रीय नीलामी में प्रदर्शित हुआ 250 साल पुराना जसवां के राजा का शाही पोर्ट्रेट
हिमाचल बिजनेस स्पेशल। धर्मशाला
यह रोचक प्रसंग है कांगड़ा की एक दुर्लभ पेंटिंग का, जो पहाड़ी लघुचित्र परंपरा की उत्कृष्टता का जीवंत प्रमाण है। यह है 1760–70 के दौरान बनाया गया जसवां रियासत के राजा अभिराज सिंह जसवाल का शाही पोर्ट्रेट। यह पोर्ट्रेट जर्मनी के लुडविग हाबिगहॉर्स्ट संग्रह का हिस्सा रहा है उसे एक अंतरराष्ट्रीय नीलामी में प्रदर्शित किया गया।
अढ़ाई सदी पुरानी यह पेंटिंग इसलिए खास है कि इसका उल्लेख प्रसिद्ध कला इतिहासकार डव्ल्यू जी आर्चर की 1973 में प्रकाशित पुस्तक Indian Paintings from the Punjab Hills (1973) में मिलता है। कांगड़ा मिनिएचर पेंटिंग के आधुनिक शोधकर्ता पदमश्री विजय शर्मा ने अपनी पुस्तक
Painting in the Kangra Valley (2020) में भी इसे प्रकाशित किया है।
सोने की परत से किया अलंकरण
यह पेंटिंग गौश रंगों से बनाई गई है, जिसमें सोने की परत से अलंकरण किया गया है। गहरे नीले बॉर्डर, लाल रेखाएँ और गुलाबी किनारों की सजावट इसे और भव्य बनाती है। कांगड़ा की लघुचित्र शैली अपनी कोमल रेखाओं, प्राकृतिक रंगों और भावनात्मक अभिव्यक्ति के लिए प्रसिद्ध है। 18वीं सदी में यह शैली चरम पर थी और पूरे भारत में सराही जाती थी।
राजा अभिराज सिंह जसवाल जसवां रियासत के शासक थे, जो कांगड़ा परिवार की एक शाखा मानी जाती थी। जसवां, कांगड़ा के दक्षिण में स्थित एक छोटी लेकिन सांस्कृतिक रूप से समृद्ध पहाड़ी रियासत थी।
पेंटिंग में राजा को सुनहरे अलंकरणों से सजे परिधान में, शांत और आत्मविश्वास से भरे भाव के साथ दर्शाया गया है।
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