नॉर्थ इंडिया की पहली महिला ट्रांसपोर्टर, पहली महिला पेट्रोल पंप डीलर, पहली मारुति सर्विस स्टेशन मालिक,‘जर्नल ऑफ स्ट्रेजिक ह्यूमन रिसोर्स मेनेजमेंट’ में छपी कांगड़ा की निर्मल सेठी की प्रेरक कहानी

नॉर्थ इंडिया की पहली महिला ट्रांसपोर्टर, पहली महिला पेट्रोल पंप डीलर, पहली मारुति सर्विस स्टेशन मालिक,‘जर्नल ऑफ स्ट्रेजिक ह्यूमन रिसोर्स मेनेजमेंट’ में छपी कांगड़ा की निर्मल सेठी की प्रेरक कहानी
नॉर्थ इंडिया की पहली महिला ट्रांसपोर्टर, पहली महिला पेट्रोल पंप डीलर, पहली मारुति सर्विस स्टेशन मालिक,‘जर्नल ऑफ स्ट्रेजिक ह्यूमन रिसोर्स मेनेजमेंट’ में छपी कांगड़ा की निर्मल सेठी की प्रेरक कहानी
विनोद भावुक। धर्मशाला
‘अगर आप अपने बच्चों को पंख देते हैं, तो वे आसमान जरूर छूएंगे।‘ यह कहना है श्रीमती निर्मल सेठी का, जिनकी जिंदगी इस एक वाक्य से कहीं बढ़कर है। 1978 में जब देश में महिलाओं के लिए घर से बाहर निकलना तक एक चुनौती था, तब निर्मल सेठी ने ट्रांसपोर्ट के कारोबार में कदम रखा, जो उस दौर में पूरी तरह से पुरुषों का वर्चस्व वाला माना जाता था।
‘जर्नल ऑफ स्ट्रेजिक ह्यूमन रिसोर्स मेनेजमेंट’ के प्रकाशित सेंट्रल यूनिवर्सिटी धर्मशाला के स्कूल ऑफ बिजनेस के एसिस्टेंट प्रोफेसर गीतांजली उपाध्याय और रिसर्च स्कॉलर निशा देवी का रिसर्च पेपर यह पड़ताल करता है कि कैसे एक महिला निर्मल सेठी ने हिम्मत, हौसले और बुलंद इरादों से अकेले दम पर सामाजिक ढांचे की दीवारों को तोड़कर इतिहास रच दिया।
बाप से सिखाये बेटी को गुर
1951 में हमीरपुर में जन्मीं निर्मल सेठी को बचपन से ही एक अलग परवरिश मिली। उनके पिता शहर के सबसे अमीर व्यापारियों में से एक थे। उनके पिता चाहते थे कि उनकी बेटियां निडर होकर समाज का सामना करें। वे बेटियों के फैसलों का समर्थन करते थे। सबसे खास बात यह थी कि वे बेटी निर्मल को अपने साथ व्यापार करने ले जाते थे ताकि वो बिजनेस की बारीकियां सीख सके।
शादी के बाद जिंदा रही चाहत
जालंधर से ग्रेजुएशन के दौरान ही निर्मल की शादी सेना में अफसर के.सी. सेठी से हो गई। ग्रेजुएशन पूरा करते ही उन्होंने पति से कहा कि वह अपना खुद का कारोबार शुरू करना चाहती हैं। उनके पति का जवाब था कि जो करना चाहो करो, वह उनके साथ हैं। पति की ओर से यह एक ऐसा सपोर्ट था, जिसने निर्मल को उनके मुकाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
‘संगम हाईवे’ के सफर की शुरुआत
निर्मल ने 1978 में ‘संगम हाईवे’ के नाम से धर्मशाला से चिंतपूर्णी के बीच बस सेवा शुरू कर दी। बस चलाते ही वह नॉर्थ इंडिया की पहली महिला ट्रांसपोर्टर बन गईं। वह खुद ड्राइवर और कंडक्टर के साथ धर्मशाला से चिंतपूर्णी तक का सफर तय करती थीं। उन्होंने एक साल के अंदर उन्होंने दूसरी बस चला दी। एक तरफ दो छोटी बेटियों की परवरिश, दूसरी तरफ बिजनेस की कमान, उन्होंने दोनों को बखूबी निभाया।
तीन हजार आवेदक, अकेली महिला डीलर
1981 में इंडियन ऑयल ने कांगड़ा क्षेत्र में पेट्रोल पंप के लिए डीलरशिप का विज्ञापन निकाला। निर्मल सेठी जम्मू में इंटरव्यू देने पहुंच गईं। करीब तीन हजार आवेदकों की भीड़ में वह अकेली महिला थीं। इंटरव्यू पैनल के सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर इंदिरा गांधी देश को संभाल सकती हैं, तो वह एक पेट्रोल पंप क्यों नहीं चला सकती? इस जवाब से वे इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप की नॉर्थ इंडिया की पहली महिला डीलर बन गई।
ऑयल टैंकर और मारुति सर्विस स्टेशन
निर्मल सेठी पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने ऑयल टैंकर खरीदकर लेह-लद्दाख और कश्मीर तक तेल सप्लाई करना शुरू किया। वह हर हफ्ते खुद अम्बाला जाकर टैंकर भरवाती थीं और खुद ही उनकी सर्विसिंग और मेंटेनेंस के लिए वर्कशॉप ले जाती थीं। यह कारनामा करने वाली वह नॉर्थ इंडिया की पहली महिला बनीं। वह मारुति सर्विस स्टेशन की भी पहली महिला मालिक बनीं।
चुनौतियां और सामाजिक ठोकरें
शोधकर्ता लिखते हैं कि निर्मल सेठी का रास्ता आसान नहीं था। लोग कहते थे औरतों को ये काम नहीं करना चाहिए। पड़ोस की महिलाओं ने उनसे बात करनी बंद कर दी, लेकिन निर्मल सेठी के इरादे इतने कमजोर नहीं थे कि इन बातों से डिग जाएं। उन्होंने हमेशा पॉजिटिव अटीट्यूड रखा और हर बाधा को पार किया। सीख यही कि दूसरों की सोच बदलने के लिए पहले अपनी सोच बदलनी पड़ती है।
सपनों को पंख देकर आसमान को छूना
निर्मल सेठी ने सबसे पहले अपने पेट्रोल पंप पर महिलाओं को काम पर रखा। आज फिलिंग स्टेशनों पर महिलाओं का पेट्रोल भरना आम बात है। 2005 में जो उनकी सबसे बड़ी ताकत उनके पति, जो उनकी सबसे बड़ी ताकत थे, इस दुनिया को छोड़ गए। तब उनकी बेटियां उनकी ताकत बनीं। निर्मल सेठी की कहानी बिजनेस और प्रबंधन के स्टूडेंट्स के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को पंख देकर आसमान की ऊंचाइयों को छूना चाहते हैं।
हिमाचल और देश-दुनिया की अपडेट के लिए join करें हिमाचल बिज़नेस
https://himachalbusiness.com/the-story-of-kulu-creation-of-the-universe-from-kulu-the-spread-of-the-human-race-after-the-flood/

Jyoti maurya

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *