हजारों युवाओं को आत्मनिर्भरता की रोशनी दिखा रही ‘ज्योति’ ‘ग्लोबल साई एजुकेशन’ की संचल्क ज्योति चंदेल की प्रेरक कहानी

हजारों युवाओं को आत्मनिर्भरता की रोशनी दिखा रही ‘ज्योति’ ‘ग्लोबल साई एजुकेशन’ की संचल्क ज्योति चंदेल की प्रेरक कहानी
हजारों युवाओं को आत्मनिर्भरता की रोशनी दिखा रही ‘ज्योति’ ‘ग्लोबल साई एजुकेशन’ की संचल्क ज्योति चंदेल की प्रेरक कहानी
विनोद भावुक। धर्मशाला
इस प्रेरक कहानी की नायिका हैं कांगड़ा जिला मुख्यालय धर्मशाला की ज्योति चंदेल, जो ‘ग्लोबल साई एजुकेशन’ की मालिक हैं। इस प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान ने सैकड़ों युवाओं के लिए रोजगार के बंद दरवाजे खोले हैं। सिर्फ 800 रुपए महीने से अपने करियर की शुरुआत करने वाली एक मध्यमवर्गीय परिवार की बेटी ने कड़ी मेहनत से खुद को इस काबिल बनाया कि वे दूसरे युवाओं के लिए रोजगार ही राह बनाने वाली बन गई।
ज्योति चंदेल कंप्यूटर एजुकेशन के साथ फैशन डिजाइनिंग कोर्स भी चला रही हैं। उनके संस्थान में 14 फैकल्टी मेंबर्स काम करते हैं, जिनमें 11 महिलाएं हैं। ज्योति युवाओं को उद्यमी बनने के लिए तैयार करती हैं। वह महिलाओं के लिए एक छोटा उद्योग शुरू करना चाहती हैं, जहां वे अपने कौशल का इस्तेमाल कर सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
पढ़ते हुये ट्यूशन पढ़ाई
ज्योति चंदेल के पिता सेना में साधारण पद पर तैनात थे और माता गृहिणी थीं। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी होने के कारण उन पर जिम्मेदारियां थोड़ी अधिक थीं। आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत न होने के बावजूद, ज्योति अपने बलबूते कुछ खास करना चाहती थी। इस मिशन के लिए वह खुद पढ़ाई करती थीं और हायर सेकेंडरी के दिनों से ही साथ ट्यूशन पढ़ाकर पैसे कमाने लगीं।
ज्योति ने बीए. करते हुए एक संस्थान से कंप्यूटर का डिप्लोमा किया, जो उसके लिए गेम-चेंजर साबित हुआ। , बी.ए करते ही 21 साल की उम्र में एक स्कूल में कंप्यूटर वोकेशनल टीचर की नौकरी मिल गई। पहला वेतन मिला 800 रुपए, पर इस छोटी कमाईं ने भी आत्मनिर्भरता का एहसास कराया। कंप्यूटर में बढ़ती रुचि ने उन्हें कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से एमसीए करने के लिए प्रेरित किया।
शादी के बाद नई शुरुआत
शादी के बाद ज्योति ने कई स्कूलों और कंप्यूटर संस्थानों में पढ़ाया। 2004 में वह ‘विंटैक’ कंपनी की चेन से जुड़ गईं। 6500 रुपए प्रति माह वेतन था, लेकिन यह कंपनी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई और धर्मशाला के सेंटर बंद करने का फैसला लिया गया। जब स्थानीय मालिक ने कोस्ट कटिंग के साथ इसे संचालित किया तो ज्योति मात्र 18 स्टूडेंट्स के साथ इस नए वेंचर से जुड़ गईं।
यहीं से ज्योति के उद्यमिता के सफर की शुरुआत हुई। उन्होंने दिन-रात एक कर दिया। संस्थान को पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी और तमिलनाडु यूनिवर्सिटी से मान्यता दिलवाई। साल 2009-10 तक संस्थान में 1500 स्टूडेंट्स हो गए। ज्योति को कोर्स, एडमिशन, कर्मचारियों की भर्ती जैसे फैसले लेने का अधिकार मिल गया। उन्होंने प्रदेश में 18 सब-सेंटर खोलकर बिजनेस का विस्तार भी किया।
बुलंद हौसले से जीत की बुनियाद
2014 में पीटीयू बंद हो गया और डिस्टेंस एजुकेशन पर रोक लग गई। दस साल की मेहनत के बाद ज्योति फिर से शून्य पर आ गई थीं। इसी दौरान सरकार ने कौशल विकास की योजनाएं शुरू कीं। ज्योति ने बिना देर किए भवन किराए पर लेकर ‘ग्लोबल साई एजुकेशन’ की नींव रखी, जो संस्थान केंद्र सरकार के कौशल विकास मिशन, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और राष्ट्रीय कौशल विकास निगम की परियोजनाओं पर काम कर रहा है।
ज्योति चंदेल की कहानी सिर्फ एक सफल महिला उद्यमी की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस जज्बे की कहानी है, जो हर बार असफलता के बाद भी खड़ा हो जाता है। 800 रुपए से शुरू हुआ उनका सफर आज हजारों युवाओं को रोशनी दिखा रहा है। ज्योति चंदेल ने साबित किया है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो हर मंजिल मुश्किलों के बाद भी आसान लगने लगती है।
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Jyoti maurya

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