लंदन से 113 साल पहले छपी ‘कस्टम्स ऑफ द वर्ल्ड’ पुस्तक में ज्वाला जी मंदिर अद्भुत जानकारी और दुर्लभ तस्वीर
लंदन से 113 साल पहले छपी ‘कस्टम्स ऑफ द वर्ल्ड’ पुस्तक में ज्वाला जी मंदिर अद्भुत जानकारी और दुर्लभ तस्वीर
विनोद भावुक। ज्वाला जी (कांगड़ा)
कांगड़ा जिले में स्थित ज्वाला जी मंदिर धार्मिक स्थल भर नहीं है। यह बल्कि आस्था, भूविज्ञान और इतिहास का एक अद्भुत संगम है। यहां धरती की कोख से स्वयंभू ज्वालाएं फूटती हैं, जिन्हें मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। लंदन से 1913 में प्रकाशित पुस्तक ‘कस्टम्स ऑफ द वर्ल्ड’ में इस मंदिर की एक दुर्लभ तस्वीर छपी।
वाल्टर हचिन्सन द्वारा संपादित दो खंडों वाली पुस्तक श्रृंखला ‘कस्टम्स ऑफ द वर्ल्ड’ के पहले खंड में यह तस्वीर छपी थी। फोटोग्राफर पी. लॉन्गवर्थ डेम्स ने इस तस्वीर को कैद किया था। इसकी कैप्शन में लिखा है कि यह मंदिर पंजाब की कांगड़ा घाटी में व्यास नदी के तट पर स्थित है। जिस चट्टान पर यह मंदिर बना है, उससे ज्वालाएं निकलती हैं।
भूवैज्ञानिकों और श्रद्धालुओं के लिए खास
1905 में आए भूकंप में यह मंदिर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। 1913 की यह तस्वीर भूकंप के बाद मंदिर की स्थिति को दर्शाती है, जब इसका जीर्णोद्धार अभी पूरा नहीं हुआ था। मंदिर का सबसे अद्भुत पहलू यहां निकलने वाली ज्वालाएं हैं। भूवैज्ञानिकों के अनुसार, यह क्षेत्र प्राकृतिक गैस के भंडार के ऊपर बसा है, जो धरती की दरारों से होकर बाहर निकलती है और सदियों से जल रही है।
श्रद्धालुओं के लिए यह मां ज्वाला जी का चमत्कार है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब माता सती के शव के टुकड़े भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से कटकर धरती पर गिरे, तो उनकी जीभ इसी स्थान पर गिरी थी। इसलिए यहां धरती से ज्वालाएं निकलती हैं। महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यवासिनी, महालक्ष्मी और सरस्वती सात प्रमुख ज्वालाएं हैं।
सोने का पानी चढ़ा हुआ गुंबद
1905 के भूकंप के बाद इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया। मंदिर की संरचना में सिख वास्तुकला का प्रभाव स्पष्ट दिखता है, जिसमें सोने का पानी चढ़ा हुआ एक सुंदर गुंबद है। मंदिर के अंदर एक चबूतरा है, जिसमें सात जगहों से ज्वालाएं निकलती हैं। पुजारी इन ज्वालाओं को पवित्र मानकर इनका ध्यान रखते हैं और भक्तों को इनके दर्शन कराते हैं।
तस्वीर में जिक्र है कि यह मंदिर व्यास नदी के तट पर स्थित है। वर्तमान में मंदिर से कुछ दूरी पर व्यास नदी बहती है। मान्यता है कि मंदिर में दर्शन करने के बाद व्यास नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। नवरात्रों के समय यहां श्रद्धालुओं का अपार जनसैलाब उमड़ता है। दूर-दूर से आए भक्त मां के दर्शन कर धन्य होते हैं।
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