1908 के ब्रिटिश पोस्टकार्ड की मॉडल, शिमला की ‘ए पहाड़ी वुमेन’

1908 के ब्रिटिश पोस्टकार्ड की मॉडल, शिमला की ‘ए पहाड़ी वुमेन’
1908 के ब्रिटिश पोस्टकार्ड की मॉडल, शिमला की ‘ए पहाड़ी वुमेन’
हिमाचल बिजनेस स्पेशल। शिमला
साल 1908 कोलकाता की प्रसिद्ध फोटोग्राफी फर्म जॉन्सन एंड होफमैन ने ‘ए पहाड़ी वुमेन’ के शीर्षक से एक पोस्टकार्ड प्रकाशित किया। सवा सदी पहले 13.65 x 8.85 सेमी आकार की यह कोलोटाइप छपी तस्वीर आज केवल एक फोटो नहीं, बल्कि इतिहास का जीवंत दस्तावेज है। ब्रिटिशराज में ‘पहाड़ी’ शब्द उन मूल निवासियों के लिए प्रयोग होता था, जो शिमला और आस- पास के हिमालयी क्षेत्रों में रहते थे।
इतिहासकारों के अनुसार, पहाड़ी समाज का जीवन मैदानी इलाकों से अलग और अधिक सामुदायिक व समानतावादी था। पर्वतीय परिस्थितियों ने यहां के लोगों को मिल-जुलकर रहने, श्रम बाँटने और प्रकृति के साथ संतुलन बनाने की सीख दी। प्रख्यात लेखक रामचंद्र गुहा ने अपनी पुस्तक ‘द अंक्विट वुड्स’ में पहाड़ी जीवन की इसी सामुदायिक संस्कृति का उल्लेख किया है।
अंग्रेजों की नज़र में ‘नेचर’ चिल्ड्रेन’
अंग्रेजों में पहाड़ी समुदायों को ‘नेचर’ चिल्ड्रेन’ कहकर एक रोमांटिक और रहस्यमयी रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रसिद्ध लेखक रुडयार्ड किपलिंग ने अपनी कहानी ‘लिसपेथ’ में एक पहाड़ी महिला की सुंदरता और सादगी की तुलना ग्रीक देवी से की है। यह वर्णन औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है, जहां पहाड़ी महिलाओं को एक ‘अनोखी’ और ‘अलग’ दुनिया की छवि के रूप में दिखाया जाता था।
1908 की यह तस्वीर हमें केवल एक चेहरे से नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य, महिलाओं की सामाजिक भागीदारी, सरल जीवन, उच्च विचार तथा औपनिवेशिक दृष्टि और वास्तविकता के अंतर
सहित एक पूरे समाज की कहानी से रूबरू कराती है। तस्वीर याद दिलाती है कि हिमालय की पहाड़ियों में रहने वाली महिलाएं संस्कृति, साहस और आत्मसम्मान की प्रतीक थीं।
हिमाचल और देश-दुनिया की अपडेट के लिए join करें हिमाचल बिज़नेस
https://himachalbusiness.com/almo-devi-the-dalit-heroine-of-sirmaur-whose-bravery-made-the-british-tremble-was-sentenced-to-kala-pani/

Jyoti maurya

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *