फर्स्ट वर्ल्ड वार में अंग्रेज सेना की तरफ से लगे थे सुकेत के 240 नौजवान, सैनिकों के लिए 37 खच्चर, आर्थिक मदद के अलावा लोन भी दिया गया

फर्स्ट वर्ल्ड वार में अंग्रेज सेना की तरफ से लगे थे सुकेत के 240 नौजवान, सैनिकों के लिए 37 खच्चर, आर्थिक मदद के अलावा लोन भी दिया गया
फर्स्ट वर्ल्ड वार में अंग्रेज सेना की तरफ से लगे थे सुकेत के 240 नौजवान, सैनिकों के लिए 37 खच्चर, आर्थिक मदद के अलावा लोन भी दिया गया
विशेष संवाददाता। सुंदरनगर
1914 से 1918 तक चले फर्स्ट वर्ल्ड वार में सुकेत रियासत के 240 नौजवान अंग्रेज सेना में शामिल हुये थे। सैनिकों के लिए 37 खच्चर भी उपलब्ध कराए गए थे। युद्ध फंड के जरिये ब्रिटिश सेना को 1,90,670 रुपये की आर्थिक सहायता दी गई और लगभग 94,483 रुपये का ऋण दिया गया। रियासत की जनता ने 4,130 रुपये और सुकेट दरबार ने 44,483 रुपए अलग से दिए।
गगनदीप सिंह के सम्पादन से सुसज्जित पुस्तक ‘सुकेत रियासत के विद्रोह’ में दर्ज है कि इस युद्ध में घायल और बीमार होकर लौटे 50 सैनिकों की देखभाल का पूरा प्रबंध भी सुकेत रियासत के खजाने से किया गया था। राजा के आह्वान पर ब्रिटिश आर्मी में भर्ती हुए सैनिकों को 30 एकड़ जमीन तक प्रदान की गई। यह उस समय के हिसाब से बड़ा प्रोत्साहन था।
राजा भीमसेन का राज, ब्रिटिश दबाव और कूटनीति
गगनदीप सिंह लिखते हैं कि वर्ल्ड वार के लिए सुकेत रियासत ने लगभग दो लाख रुपये मूल्य के संसाधन और जनशक्ति अंग्रेजों को दी और करीब एक लाख रुपये का ऋण अलग से दिया था। उस दौर में एक छोटी सी पहाड़ी रियासत के लिए यह ब्रिटिश सेना के लिए यह योगदान जहां अत्यंत महत्वपूर्ण था, वहीं सुकेत रियासत के लिए बड़ी आर्थिक रगड़ थी।
‘सुकेत रियासत के विद्रोह’ में दर्ज है कि उस समय सुकेत रियासत पर राजा भीमसेन का राज था। वर्ल्ड वार के बीच 1916 में पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ’डायर ने सुकेत का दौरा किया। इस यात्रा का उद्देश्य ब्रिटिश सेना को मजबूर बनाने के लिए संसाधनों का प्रबंधन करना था। सुकेत के राजा ने अंग्रेजों की मदद में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह ब्रिटिश दबाव और कूटनीति का परिणाम था।
लाहौर से पढे थे भीमसेन, निमोनिया से हुई मौत
इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि उस समय सुकेत के शासक राजा भीमसेन एक शिक्षित, आधुनिक सोच वाले और प्रशासनिक दृष्टि से सक्रिय शासक थे। उन्होंने लाहौर के प्रतिष्ठित कॉलेज से शिक्षा ग्रहण की थी। पंजाब के तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर सर लुईस डेन ने उन्हें सुकेत के शासन की पूर्ण शक्तियां प्रदान की थीं। शासन संभालते ही उन्होंने विकास के कई बड़े काम किए थे।
बनेड (वर्तमान सुंदरनगर) में किंग एडवर्ड अस्पताल की स्थापना, बनेड, सेरी और डेहर में आधुनिक बंगलों का निर्माण, बनेड से मंडी तक मोटर योग्य सड़क का निर्माण और वनों के दोहन और रियासत की राजस्व व्यवस्था को सुदृढ़ करना जैसे कार्य राजा भीमसेन के शासनकाल में हुए। उनका शासनकाल अल्पकालीन था। 1919 में निमोनिया से उनका निधन हो गया। विकास, प्रशासनिक सुधार और विश्वयुद्ध में सक्रिय भूमिका के लिए याद किया जाता है।
Image : AI Generated
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Jyoti maurya

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