5 करोड़ साल पहले सुबाथु में तैरती थीं तितलियों जैसी 13 फीट चौड़ी पंखों वाली मछलियां

5 करोड़ साल पहले सुबाथु में तैरती थीं तितलियों जैसी 13 फीट चौड़ी पंखों वाली मछलियां
5 करोड़ साल पहले सुबाथु में तैरती थीं तितलियों जैसी 13 फीट चौड़ी पंखों वाली मछलियां
अजय शर्मा। सोलन
सोलन जिले का सुबाथु कस्बा बेशक औपनिवेशिक इतिहास के लिए जाना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह क्षेत्र कभी समुद्र की लहरों के नीचे था। लगभग 5–6 करोड़ वर्ष पहले ईओसीन काल में जब हिमालय अभी उठ ही रहा था, तब सुबाथु क्षेत्र उथले समुद्र का हिस्सा था और यहीं पर तितलियों जैसी चौड़ी पंखों वाली मछलियां तैरती थीं।
बटरफ्लाई रे समुद्री मछलियों का एक अनोखा समूह है। इनका शरीर अत्यंत चपटा और चौड़ा होता है, पंख इतने फैले कि ये समुद्र में तितली की तरह फिसलती प्रतीत होती हैं। इनकी चौड़ाई: 4 मीटर (13 फीट) तक होती है और पूंछ बेहद छोटी, धागे जैसी होती है। छोटी मछलियां, झींगे और घोंघे इनका भोजन होता है। ये गर्म महासागरों में पाई जाती हैं, लेकिन इनका इतिहास हमें सीधे सुबाथु तक ले जाता है।
सुबाथु फॉर्मेशन: हिमालय के नीचे छुपा समुद्र
सुबाथु फॉर्मेशन उत्तर-पश्चिमी हिमालय की सबसे महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक परतों में से एक है। यहीं से वैज्ञानिकों ने बटरफ्लाई रे के प्राचीन रिश्तेदारों के जीवाश्म खोजे हैं। सुबाथुनुरा नामक एक विलुप्त जीवाश्म, जिसकी पहचान 1987 में कुमार और लॉयल ने की, इसी क्षेत्र से मिली। यह खोज इस बात का प्रमाण है कि हिमालय क्षेत्र कभी समुद्री जीवन से भरा था। भारत की टेक्टोनिक प्लेट की टक्कर से पहले यहां उष्ण समुद्र मौजूद था।
कल्पना कीजिए,आज के देवदारों और पहाड़ियों की जगह कभी यहां नीले समुद्र थे, और बटरफ्लाई रे जैसी विशाल, पंखदार मछलियां रेत पर तैरती थीं। सुबाथु की चट्टानें आज भी उन लहरों की कहानी सुनाती हैं। सुबाथु जीवाश्म ने बटरफ्लाई रे के विकास को समझने में मदद की और भारत, अफ्रीका और यूरोप के जीवाश्मों के बीच वैश्विक कड़ी स्थापित हुई।
जीवाश्म विज्ञान के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
सुबाथु हमें सिखाता है कि प्रकृति का इतिहास किताबों तक सीमित नहीं, वह हमारे पैरों के नीचे बसा है। यह क्षेत्र न सिर्फ़ पर्यटन बल्कि, जियो-हेरिटेज के रूप में भी अपार संभावनाएं रखता है। बटरफ्लाई रे का जीवाश्म रिकॉर्ड सुबाथु से जुड़ा है, जो वैज्ञानिक प्रमाण सहित साबित करता है कि हिमालय क्षेत्र कभी समुद्र था। बटरफ्लाई रे का जीवाश्म भारतीय जीवाश्म विज्ञान के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है।
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Jyoti maurya

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