रासायन-मुक्त खेती से स्वास्थ्य का संकल्प: ‘एग्रीवा नैचुरली’ की हरित सफलता कहानी

रासायन-मुक्त खेती से स्वास्थ्य का संकल्प: ‘एग्रीवा नैचुरली’ की हरित सफलता कहानी
रासायन-मुक्त खेती से स्वास्थ्य का संकल्प: ‘एग्रीवा नैचुरली’ की हरित सफलता कहानी
विनोद भावुक। शिमला
जहां ज़्यादातर किसान रसायनों पर निर्भर खेती को मजबूरी मानते हैं, वहीं हिमाचल के ऊना ज़िले के अंब क्षेत्र के छोटे से गांव बेहर-बिठाल में एक अलग सोच ने आकार लिया। यह कहानी है रीवा सूद कीजि, न्होंने यह साबित कर दिया कि प्रकृति के साथ काम करके भी न सिर्फ़ खेती की जा सकती है, बल्कि उसे एक सशक्त ब्रांड में बदला जा सकता है।
साल 2022 में शुरू हुई एग्रीवा नैचुरली की नींव एक सरल लेकिन मजबूत विश्वास पर रखी गई कि स्वस्थ जीवन की शुरुआत शुद्ध और ईमानदार खेती से होती है। इसी सोच के साथ रीवा सूद ने रसायनों से दूरी बनाते हुए पूरी तरह केमिकल-फ्री और ऑर्गेनिक फार्मिंग को अपनाया।
उनके फार्म पर आज ऐसे उच्च मूल्य वाले और पोषण से भरपूर फसलें उगाई जा रही हैं, जो हिमाचल प्रदेश में अपेक्षाकृत नई मानी जाती हैं, जैसे ड्रैगन फ्रूट, अंजीर, अश्वगंधा और स्टीविया। जैविक खाद, मौसमी चक्रों के सम्मान और मिट्टी संरक्षण पर आधारित खेती ने न केवल भूमि की सेहत बनाए रखी, बल्कि उपज को भी प्राकृतिक पोषण से भरपूर बनाया।
एग्रीवा नैचुरली की खास पहचान केवल खेती तक सीमित नहीं है। यहां वैल्यू एडिशन को भी उतनी ही अहमियत दी गई। खेत में उगे ड्रैगन फ्रूट से लेकर प्राकृतिक, ताज़ा और केमिकल-फ्री जूस तैयार करने तक पूरी गुणवत्ता श्रृंखला पर खुद ब्रांड का नियंत्रण है। यही वजह है कि एग्रीवा नैचुरली आज सिर्फ़ एक फार्म नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और वेलनेस का भरोसेमंद नाम बनता जा रहा है।
रीवा सूद कहती हैं’ हम प्रकृति के खिलाफ नहीं, उसके साथ काम करने में विश्वास रखते हैं। हमारा वादा है कि खेत से सीधे, शुद्ध और सेहतमंद उत्पाद, एक बेहतर भविष्य के लिए।’
आज एग्रीवा नैचुरली न केवल हिमाचल प्रदेश में एक्ज़ॉटिक सुपरफ्रूट्स की नई पहचान बना रहा है, बल्कि यह संदेश भी दे रहा है कि अगर सोच साफ़ हो और संकल्प मज़बूत, तो टिकाऊ खेती ही भविष्य का रास्ता है। यह कहानी सिर्फ़ खेती की नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, नवाचार और आत्मनिर्भर हिमाचल की कहानी है—जहां हर फल में प्रकृति का सम्मान और किसान का स्वाभिमान झलकता है।
हिमाचल और देश-दुनिया की अपडेट के लिए join करें हिमाचल बिज़नेस
https://himachalbusiness.com/a-dream-connected-to-the-forests-a-force-created-by-women-the-inspiring-story-of-mountain-bounties/

Jyoti maurya

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *