चंबा राजमहल में1867 में नियुक्त किया था यूरोपीय डॉक्टर, 159 साल पहले कश्मीर में सेवा देने वाले डॉक्टर जैक्सन एल्मस्ली ने संभाली थी जिम्मेवारी
चंबा राजमहल में1867 में नियुक्त किया था यूरोपीय डॉक्टर, 159 साल पहले कश्मीर में सेवा देने वाले डॉक्टर जैक्सन एल्मस्ली ने संभाली थी जिम्मेवारी
हिमाचल बिजनेस स्पेशल। चंबा
जी हाँ, 159 साल पहले चंबा रॉयल फैमिली की प्राथमिक चिकित्सा की ज़िम्मेदारी यूरोपियन डॉक्टर विलियम जैक्सन एल्मस्ली ने संभाली थी। डॉ एल्मस्ली उस समय कश्मीर में सेवाएँ दे रहे थे, अस्थाई तौर पर चंबा रियासत के चिकित्सक तैनात हुये थे। बाद में अगले सात साल के लिए उन्हें राजपरिवार का डॉक्टर नियुक्त किया गया था।
1867 में चंबा रियासत के राजा श्री सिंह ने खुद यूरोपीय मेडिकल मिशनरी को चबा आने के लिए न्यौता भेजा। चंबा से शुरू हुई अनूठी पहल ने पूरे उत्तर भारत में चर्चा छेड़ दी थी। 31 जनवरी 1867 को चंबा के शासक ने एक प्रशासनिक आदेश में पंजाब मेडिकल मिशनरी सोसाइटी को सात वर्षों के लिए एक यूरोपीय चिकित्सक चंबा में नियुक्त करने का औपचारिक न्योता दिया।
‘क्रिश्चन वर्क’ में प्रकाशित हुआ राजा का आदेश
चंबा के राजा ने डॉक्टर का वेतन, आवास, अस्पताल, दवाइयाँ और सभी खर्च वहन करने के वचन दिया।
राजा का यह आदेश मई 1867 में उस समय की पत्रिका ‘क्रिश्चन वर्क’ में प्रकाशित हुआ और इसे एक गैर-ईसाई राजकुमार का उल्लेखनीय आदेश बताया गया। इस आदेश के मुताबिक डॉक्टर के लिए 2,400 वार्षिक अनुदान तय किया गया।
राजा के आदेश के मुताबिक मुफ्त मकान, अस्पताल और डिस्पेंसरी, दवाइयों व उपकरणों का पूरा खर्च, सात वर्षों तक जॉब गारंटी शामिल थी। यूरोपीय चिकित्सक की ज़िम्मेदारी राजपरिवार को प्राथमिक चिकित्सा सेवा देना था। आदेश में मिशनरी डॉक्टर को धार्मिक कार्य की पूर्ण स्वतंत्रता दी गई। यह पहल पंजाब मेडिकल मिशिमरी सोसायटी के सहयोग से आगे बढ़ाई जानी थी।
चंबा को मिला कश्मीर से डॉक्टर
कश्मीर से जुड़े चिकित्सक विलियम जैक्सन एल्मस्ली ने चंबा को चिकित्सकीय मिशन के लिए ओपन डोर बताया। उन्होंने चंबा में अस्थायी रूप से सेवा देकर स्थायी नियुक्ति के लिए मार्ग प्रशस्त किया। उनकी रिपोर्ट के अनुसार, चंबा घाटी में आधुनिक चिकित्सा की भारी कमी थी और स्थानीय जनता उत्सुकता से नई पद्धति को अपनाने को तैयार थी।
चंबा के राजा का यह कदम बताता है कि 19वीं सदी के भारत में भी प्रगतिशील सोच मौजूद थी। धार्मिक मतभेदों के बावजूद स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता देना उस समय एक साहसिक निर्णय था।1864 में शिमला ब्रिटिश प्रशासन का ग्रीष्मकालीन केंद्र बन चुका था। ऐसे में चंबा जैसी पहाड़ी रियासतों में होने वाली पहलें सीधे शिमला और पंजाब प्रशासन की निगाह में आती थीं।
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