करुणा की विरासत: ब्रिटिश महिला ने 1935 में दी थी मनाली को अस्पताल की सौगात, 90 सालों से पहाड़ी इलाक़ों के लिए जीवनरेखा बनकर निभा रहा साथ
करुणा की विरासत: ब्रिटिश महिला ने 1935 में दी थी मनाली को अस्पताल की सौगात, 90 सालों से पहाड़ी इलाक़ों के लिए जीवनरेखा बनकर निभा रहा साथ
विनोद भावुक। मनाली
हिमालय की गोद में बसा मनाली केवल देवभूमि की कथाओं या बर्फ़ीले सौंदर्य के लिए ही नहीं जाना जाता, यहां करुणा और सेवा की एक ऐसी कहानी भी रची गई, जिसने पीढ़ियों का जीवन बदल दिया। यह कहानी है लेडी मैरी विलिंगडन की, जिनकी पहल पर 90 साल पहले बना लेडी विलिंगडन अस्पताल आज भी मनाली और आसपास के पहाड़ी इलाक़ों के लिए जीवनरेखा बना हुआ है।
उस समय रोहतांग दर्रे से आगे जाने से पहले का अंतिम पड़ाव था मनाली। न सड़कें थीं, न वाहन। सिल्क रूट की ओर जाने वाले व्यापारी खच्चरों और टट्टुओं के सहारे इन दुर्गम पगडंडियों को पार करते थे। लकड़ी के कुछ घर और बिखरे गांव, बस यही था उस दौर का मनाली। 1935 में भारत के वायसरॉय की पत्नी लेडी मैरी विलिंगडन घोड़े पर सवार होकर मनाली पहुंची।
90 साल से लोगों की हेल्थ केयर
लेडी विलिंगडन के स्वागत में केवल चार स्थानीय परिवार पहुंचे, जिनकी आंखों में एक विनती थी। उन्होंने बताया कि मनाली में न कोई अस्पताल है, न कोई डॉक्टर। यह सुनकर लेडी विलिंगडन ने इस पहाड़ी क्षेत्र के लिए चिकित्सा सुविधा स्थापित करने का संकल्प लिया। इसके लिए धन जुटाया गया और एक डिस्पेंसरी की नींव पड़ी। अगले ही वर्ष वे फिर मनाली लौटीं और उस भवन का उद्घाटन किया और अस्पताल की यात्रा शुरू हुई।
शुरु में अस्पताल का संचालन चर्च द्वारा किया गया। समय के साथ इसका दायित्व कनाडा, स्कॉटलैंड, इंग्लैंड
से होता हुआ स्वतंत्रता के बाद चर्च ऑफ़ नॉर्थ इंडिया के पास आया। आज भी चर्च ऑफ़ नॉर्थ इंडिया के अधीन यह अस्पताल सेवा दे रहा है। मनाली में लेडी विलिंगडन अस्पताल की विशेष साख है। 90 साल से यह अस्पताल स्थानीय लोगों को भरोसे की स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कर रहा है।
डॉक्टर जिन्होंने इतिहास रचा
इस अस्पताल के इतिहास में कई नाम आज भी श्रद्धा से लिए जाते हैं। डॉ. बर्फ़ुट, डॉ. पीटर, मार्गरेट स्नेल, डॉ. क्लेयर जोसेफ और विशेष रूप से डॉ. जॉर्ज (लाजी) वर्गीज़ और डॉ. शीला वर्गीज़। इन्हीं के दूरदर्शी नेतृत्व में अस्पताल का बड़ा विस्तार हुआ और वे भवन अस्तित्व में आए, जिनमें आज यह संचालित हो रहा है। उनके प्रयासों से 1986 में ‘डे स्टार स्कूल’ की स्थापना भी हुई, जिसने शिक्षा के क्षेत्र में नई रोशनी दी।
2004 से अस्पताल की बागडोर डॉ. फिलिप और डॉ. अन्ना एलेक्ज़ेंडर के हाथों में है, जो आज भी पूरी निष्ठा से सेवा में जुटे हैं। आज का लेडी विलिंगडन अस्पताल आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से सुसज्जित 55-बेड का सेकेंडरी लेवल अस्पताल है। यह मनाली क्षेत्र का एकमात्र ऐसा संस्थान, जहां संपूर्ण सर्जिकल और मेडिकल देखभाल संभव है। लेडी विलिंगडन उन विरली ब्रिटिश महिलाओं में थीं, जिन्होंने सत्ता को संवेदना से जोड़ा।
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