किताब जो पढ़नी चाहिए : देवभूमि की एक सदी पहले की लोककलाओं का ऐतिहासिक दस्तावेज़ ‘हिमालयन आर्ट’
किताब जो पढ़नी चाहिए : देवभूमि की एक सदी पहले की लोककलाओं का ऐतिहासिक दस्तावेज़ ‘हिमालयन आर्ट’
विनोद भावुक। धर्मशाला
‘किताब जो पढ़नी चाहिए’ सीरीज की पहली कड़ी में बात 1931 में प्रकाशित हुई और बाद में कई बार छपी एक दुर्लभ किताब ‘हिमालयन आर्ट’ (Himalayan Art) की। ब्रिटिश आईसीएस ऑफिसर जे सी फ्रेंच की इस पुस्तक ने पहाड़ों की चित्रकला शैली, रंग और आध्यात्मिकता को इस तरह से दुनिया के सामने उजागर किया कि आज भी यह शोधार्थियों, कलाकारों और इतिहासकारों के लिए मार्गदर्शक बनी हुई है।
‘हिमालयन आर्ट’ पुस्तक जे सी फ्रेंच की रूमानी यात्रा है, जिसमें उन्होंने हिमालय की कला खासकर कांगड़ा घाटी और आसपास के इलाकों की पेंटिंग, मूर्तिकला और स्थापत्य परंपराओं पर विस्तार से लिखा है। फ्रेंच अपने पाठकों को पहाड़ की उस संस्कृति में ले जाते हैं, जहाँ कला सिर्फ सजावट नहीं, आस्था, जीवन और प्रकृति का प्रतिबिंब थी।
कांगड़ा पेंटिंग : गुनगुनाने लगते हैं चित्र
कांगड़ा शैली की लघु चित्रकला को लेकर फ्रेंच लिखते हैं कि इस चित्रों में पहाड़ की कोमलता और लोक-भावना साफ झलकती है। हरे-भरे बाग, बहती ब्यास और नर्म रंगों में राधा–कृष्ण की छवि, इन चित्रों में पहाड़ की कोमलता और लोक-भावना साफ झलकती है। कांगड़ा मिनिएचर पेंटिंग्स में प्रेम, प्रकृति और भक्ति का ऐसा मेल मिलता है कि चित्र जैसे गुनगुनाने लगते हैं।
चंबा रुमाल : सुई में पिरोई कविता
‘दो रूखे टांके’ की कढ़ाई को लेकर दुनिया भर में मशहूर चंबा रुमाल की कला को लेकर जेसी फ्रेंच लिखते हैं कि यह सुई में पिरोई कविता जैसा है। डबल साटन स्टिच की बारीकी, देवी–देवताओं के दृश्य, विवाह और त्योहार की झलक जैसे विषयों पर आधारित दोनों तरफ से एक-सा दिखने वाला चंबा रूमाल बेजोड़ और बेमिसाल है।
लाहौल की थंका पेंटिंग: ध्यान का साधना
लाहौल की थंका पेंटिंग की विशेषता को लेकर फ्रेंच लिखते हैं कि ऊँचे पहाड़, बर्फीली हवा और मठों में जलती घी की लौ। यहां थंका चित्रकला साधना है। हर आकृति, हर मुद्रा का धार्मिक अर्थ है। वे लिखते हैं कि थंका पेंटिंग ध्यान और अनुशासन की उपज है। थंका पेंटिंग बनाने वाला हर कलाकार साधक है और कला साधना में रत है।
लकड़ी पर नक्काशी :लीविंग आर्किटेक्ट
कुल्लू, मंडी, कांगड़ा और लाहौल स्पीति के मंदिरों में पत्थर और लकड़ी का संगम अद्भुत है। देवदार की लकड़ी पर बारीक नक्काशी स्थानीय कलाकारों के हुनर की मुंह बोलती तस्वीर है। स्थानीय कारीगर पीढ़ियों से लकड़ी नक्काशी का यही काम करते आए हैं। फ्रेंच इसे जीती-जागती वास्तुकला बताते हुये लिखते हैं कि यह ‘लीविंग आर्किटेक्ट’ है।
कलात्मक आत्मा को जगाती पुस्तक
‘हिमालयन आर्ट’ हिमालय की कलात्मक आत्मा को जगाती है, जहां हर चित्र एक कहानी, हर रंग एक भावना, और हर रेखा पहाड़ों की गूँज है। यह किताब कला, इतिहास और संस्कृति के प्रेमियों के लिए एक अनमोल खज़ाना है। यह देवभूमि हिमाचल प्रदेश के लोककलाओं का ऐतिहासिक दस्तावेज़ है। लोकजीवन संग जुड़ी कला, जहां हर पेंटिंग, हर कढ़ाई और हर लकड़ी की नक्काशी में लोक-आस्था बोलती है।
पढ़ने और खोजने के लिए संदर्भ
इस लिंक पर आप किताब का विवरण, प्रकाशन वर्ष, पृष्ठ संख्या और अन्य बिब्लियोग्राफिक जानकारी देख सकते हैं।
राष्ट्रीय पुस्तकालय के रिकॉर्ड में इस किताब के बारे में विस्तृत प्रकाशन जानकारी मिलती है।
यहां इस किताब को एक ऐतिहासिक आर्टिफैक्ट के रूप में सूचीबद्ध किया गया है और हिमालयी कला के बारे में बताता है।
Google Books पर किताब का प्रिव्यू, ISBN और कुछ शब्द-स्निपेट उपलब्ध हैं।
यहां आप किताब का पेपरबैक एडिशन ऑनलाइन देख सकते हैं और खरीदने के लिए लिंक पा सकते हैं।
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यह एक स्कैन की हुई PDF फाइल है जो मूल 1931 एडिशन को दिखाती है (पुराने एडिशन का प्रिंट)।
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