धर्मशाला की डेढ़ सदी पुरानी दुर्लभ तस्वीर, नेशनल आर्मी म्यूज़ियम लंदन में महफूज, इतिहास का नया दरवाजा खोलती 1873 की एक तस्वीर

धर्मशाला की डेढ़ सदी पुरानी दुर्लभ तस्वीर, नेशनल आर्मी म्यूज़ियम लंदन में महफूज, इतिहास का नया दरवाजा खोलती 1873 की एक तस्वीर
धर्मशाला की डेढ़ सदी पुरानी दुर्लभ तस्वीर, नेशनल आर्मी म्यूज़ियम लंदन में महफूज, इतिहास का नया दरवाजा खोलती 1873 की एक तस्वीर
विनोद भावुक। धर्मशाला
हिल स्टेशन धर्मशाला, जिसे आज दुनियाभर में दलाई लामा की शरणस्थली, इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, देवदार के जंगल और पर्यटन के लिए जाना जाता है, कभी ब्रिटिश सेना की एक महत्वपूर्ण कैंटोनमेंट थी। इसके इतिहास की झलक मिलती है साल 1873 की एक दुर्लभ तस्वीर में, जो नेशनल आर्मी म्यूज़ियम लंदन के संग्रह का हिस्सा है।
यह सिर्फ़ एक फोटो नहीं, बल्कि धर्मशाला की उस बीती दुनिया की खिड़की है, जब धर्मशाला ब्रिटिश अधिकारियों, गोरखा सैनिकों और उनके परिवारों का शांत, लेकिन रणनीतिक ठिकाना था। तस्वीर इतिहास का नया दरवाजा खोलती है। यह तस्वीर उसी जीवनशैली की शांत, लेकिन बहुत कुछ कहती हुई निशानी है।
पहाड़ों पर ब्रिटिश सेना की ‘हिल लाइफ़’
साल 1873 की इस तस्वीर में दिखाई दे रहे हैं ब्रिटिश अधिकारी, उनके परिवार, गोरखा रेजिमेंट के सैनिक तथा दाईं ओर रखा बैडमिंटन व क्रोकेट का सामान। यह तस्वीर सिर्फ सैन्य जीवन का विवरण ही नहीं, बल्कि उस दौर के अंग्रेज़ों के सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन का भी अनोखा दस्तावेज़ है।
तस्वीर में दिख रहे कर्नल जेम्स सेबेस्टियन रॉलिंस पहले सिख युद्ध, बर्मा युद्ध के अनुभवी और धर्मशाला में पहली गोरखा रेजीमेंट के कमांडर थे। चार्ल्स आर्चीबाल्ड मर्सर इस फ़ोटोग्राफ़ एलबम के संकलक हैं। उन्होंने रॉलिंस की बेटी हेलेन एलाइज़ा से विवाह किया था। जिम रॉलिंस’ कर्नल रॉलिंस के बेटे थे।
सैन्य दुनिया और पहाड़ी संस्कृति
ब्रिटिश इतिहास में धर्मशाला सिर्फ़ एक सैन्य चौकी नहीं, बल्कि एक आरामगाह, और एक सुरक्षित ठिकाना था। यहाँ हर सर्दी में अंग्रेज़ अधिकारी अपनी टुकड़ियों के साथ आकर बसते थे। गोरखा रेजिमेंटें पहाड़ों की रक्षा करती थीं और अधिकारी परिवारों के साथ हिल स्टेशन लाइफ़ जीते थे।
यह तस्वीर ब्रिटिश शासन की वास्तविक जीवन-शैली दिखाती है। सैन्य इतिहास और सामाजिक इतिहास दोनों के मिश्रण वाली यह तस्वीर धर्मशाला के शुरुआती शहरी विकास को समझने का आधार देती है।
यह गोरखा रेजिमेंट्स की उपस्थिति का दुर्लभ दस्तावेज़ है।
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Jyoti maurya

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