आम शब्दों में दिया खास संदेश, योगेश्वर शर्मा का अंजाद है विशेष, अध्यापन और लेखन को समर्पित प्रेरक जीवन
आम शब्दों में दिया खास संदेश, योगेश्वर शर्मा का अंजाद है विशेष, अध्यापन और लेखन को समर्पित प्रेरक जीवन
विनोद भावुक। मंडी
हिमाचल प्रदेश की साहित्यिक दुनिया में 89 साल के योगेश्वर शर्मा का योगदान अद्वितीय और प्रेरक है। 13 जुलाई 1936 को मंडी में जन्मे योगेश्वर शर्मा ने जीवन भर अध्यापन और लेखन को अपनी साधना और सेवा का माध्यम बनाया। 2023 में उनका कहानी संग्रह ‘मेरी प्रिय कहानियां’ प्रकाशित हुआ है।
उनकी कहानियां, कविताएं और लघु-निबंध सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय संवेदनाओं का सूक्ष्म चित्रण हैं। उनकी लेखनी में हास्य और व्यंग्य इतना स्वाभाविक है कि गंभीर विषय भी पाठक के हृदय में सहजता से उतर जाते हैं।
आम शब्दों में खास संदेश
योगेश्वर शर्मा की लेखन शैली में सरलता, भाव की प्रधानता और आंचलिक जीवन के प्रति गहरा प्रेम झलकता है। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘नंगा आदमी’,‘आ गया भरारीघाट’, ‘फ़ोन पर महानगर’, ‘टेकरी पर घर’, ‘कविता की किताब और सर्फ का पैकेट’, ‘बसाव’ और ‘मेरी प्रिय कहानियां’ शामिल हैं।
उनकी कहानियों में बाल मनोविज्ञान की सूक्ष्म समझ, पुराने संगीत और सांस्कृतिक विरासत का सम्मान, और आधुनिक जीवन की जटिलताओं का मार्मिक चित्रण मिलता है। वे अपनी कहानियों के माध्यम से पाठकों को न केवल सोचने, बल्कि महसूस करने की प्रेरणा देते हैं।
कहानियों के जरिये सवाल
योगेश्वर शर्मा की कहानी ‘शिमला की पहाड़ियां’ में वे सवाल उठाते हैं, ‘क्या शिमला की पहाड़ियां अब भी वैसी ही हैं, या सब मकानों में बदल गई हैं?’ यह प्रश्न पाठक को समय, परिवर्तनों और पर्यावरणीय चेतना पर सोचने को मजबूर करता है।
उनकी कृति ‘बसाव’ 18 कहानियों और लघु-निबंधों का संग्रह है, जिसमें हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, परंपराओं, बदलते सामाजिक परिवेश और आधुनिक जीवन की जटिलताओं को सरल शब्दों में पिरोया गया है।
जागरूक और संवेदनशील बनती लेखनी
लंबे समय तक महाविद्यालय स्तर पर अध्यापन करने वाले योगेश्वर शर्मा की लेखनी यह प्रमाणित करती है कि साहित्य केवल शब्दों का खेल नहीं, बल्कि संवेदनाओं, अनुभवों और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतिबिंब है।
अपने जीवन का आधा दशक साहित्य साधना को देने वाले योगेश्वर शर्मा की लेखनी हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक धारा को समृद्ध करने के साथ-साथ नए पाठकों को साहित्य के प्रति जागरूक और संवेदनशील बनाती है।
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