गौरव, ज्ञान और गर्व से भरी प्रेरक कहानी : बिना सीमेंट भी बन सकते हैं मजबूत घर, हिमाचल की धरती से दुनिया तक, पांगणा की ‘लचीली निर्माण कला’ को अंतरराष्ट्रीय पहचान

गौरव, ज्ञान और गर्व से भरी प्रेरक कहानी : बिना सीमेंट भी बन सकते हैं मजबूत घर, हिमाचल की धरती से दुनिया तक, पांगणा की ‘लचीली निर्माण कला’ को अंतरराष्ट्रीय पहचान
गौरव, ज्ञान और गर्व से भरी प्रेरक कहानी : बिना सीमेंट भी बन सकते हैं मजबूत घर, हिमाचल की धरती से दुनिया तक, पांगणा की ‘लचीली निर्माण कला’ को अंतरराष्ट्रीय पहचान
जगदीश शर्मा । पांगणा
हिमालय की गोद में बसे छोटी-सी तहसील पांगणा से उठी एक लोकल पहल अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतिहास रच रही है। ऊपरी मंडी ज़िले के ग्राम दिशा ट्रस्ट, बाग–पांगणा द्वारा पारंपरिक तकनीकों, स्थानीय शिल्प और सीमेंट शून्य निर्माण पर आधारित काम को दुनिया ने सलाम किया है।
ICIMOD हिमालयी देशों की सबसे प्रतिष्ठित संस्थाओं में शामिल ICIMOD ने अपने 2025 के बड़े प्रकाशन ‘Climate-Resilient Construction in the Hindu Kush Himalaya’ में ग्राम दिशा ट्रस्ट के कार्य को विशेष केस स्टडी’ के रूप में शामिल किया है।
पांगणा का मॉडल क्यों खास है
यह सिर्फ एक सम्मान नहीं है। यह हिमाचल प्रदेश की सदियों पुरानी निर्माण कला की वैश्विक पुनर्स्थापना है। पांगणा का मॉडल शून्य सीमेंट निर्माण पर आधारित है। जब दुनिया कार्बन फुटप्रिंट घटाने की बातें कर रही है, पांगणा ने साबित किया बिना सीमेंट भी मजबूत घर बन सकते हैं।
स्थानीय मिट्टी, लकड़ी, काठ-कोणी–कणी, पत्थर और बौलों से बने भवन, न सिर्फ खूबसूरत हैं, बल्कि भूकंप और मौसम के प्रति अत्यंत लचीले हैं। इनके निर्माण में स्थानीय मजदूर, स्थानीय कौशल शामिल है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं।
गांव की अर्थव्यवस्था और कौशल का पुनर्जागरण
यह परियोजना सिर्फ इमारतों का नहीं है। गांव की अर्थव्यवस्था और कौशल का भी पुनर्जागरण है।
लोहार, तरखान, पत्थर के राजमिस्त्री, घराटी, इन स्वदेशी शिल्पकारों के कौशल को दस्तावेज़ करके संरक्षित किया जा रहा है। 2024 का ‘लोहार शास्त्र’ कार्यक्रम इसी दिशा की ऐतिहासिक पहल था।
ICIMOD की केस स्टडी Material Reuse for Improved Cattle Shed’ में बाग–पांगणा का लो-टेक, टिकाऊ, स्थानीय सामग्रियों से निर्मित ‘पशु-शेड मॉडल’ को दुनिया का उत्कृष्ट उदाहरण बताया गया। यह सरल और कम-खर्चीला है और हर किसान इसे अपने घर, शेड या छोटे भवनों के लिए अपना सकता है।
हिमालयी निर्माण को नई सांस
सीधी भाषा में कहें तो पांगणा मॉडल स्थानीय पत्थर और लकड़ी से निर्मित भूकंप रोधी लचीला निर्माण है जो बारिश, बर्फ और ठंडे तापमान में सुहावना और प्राकृतिक इन्सुलेशन आधारित है। इसके निर्माण से गांव में ही रोजगार मिलता है।
यह पुरानी शिल्प परंपराओं को नया जीवन देने वाला है। ग्राम दिशा ट्रस्ट की ट्रस्टी मंडी निवासी अंशुल वालिया इस अभियान की मुख्य वास्तुकार हैं। उन्होंने स्थानीय समुदायों, किसानों और शिल्पकारों को जोड़कर हिमालयी निर्माण को फिर से सांस दी है।
हिमाचल के गांव भविष्य की प्रयोगशालाएं
ट्रस्ट के संस्थापक ट्रस्टी आशीष गुप्ता कहते हैं, पहाड़ में टिकाऊ निर्माण वही है, जो पहाड़ की मिट्टी, पहाड़ के कारीगर और पहाड़ के मिज़ाज के अनुसार बने। आज दुनिया उनसे सहमत है। यह सिर्फ पांगणा की जीत नहीं है, शिल्पकला में हिमाचल प्रदेश का वैश्विक सम्मान है।
इस अंतरराष्ट्रीय मान्यता ने यह साबित कर दिया कि हिमाचल प्रदेश के गांव सिर्फ विरासत नहीं, भविष्य की निर्माण–प्रयोगशालाएं हैं। यह मॉडल आने वाले वर्षों में सरकारी इमारतों, होमस्टे, स्कूलों, एग्री-शेडों और ग्रामीण आवास में नई दिशा तय कर सकता है।
हिमाचल और देश-दुनिया की अपडेट के लिए join करें हिमाचल बिज़नेस
https://himachalbusiness.com/read-how-the-serene-valleys-of-kullu-instilled-a-will-to-live-in-a-sick-and-weak-canadian-woman-memories-revived-after-45-years-through-a-facebook-post/

Jyoti maurya

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *