लाहौल- स्पीति की बर्फ़ीली घाटियों, प्राचीन मठों और लुप्त होती सभ्यताओं को कैमरे की नज़र ने जीवंत करने वाले दिल्ली के बिनोय के बहल

लाहौल- स्पीति की बर्फ़ीली घाटियों, प्राचीन मठों और लुप्त होती सभ्यताओं को कैमरे की नज़र ने जीवंत करने वाले दिल्ली के बिनोय के बहल
लाहौल- स्पीति की बर्फ़ीली घाटियों, प्राचीन मठों और लुप्त होती सभ्यताओं को कैमरे की नज़र ने जीवंत करने वाले दिल्ली के बिनोय के बहल
विनोद भावुक। केलंग
लाहौल जैसे दुर्गम क्षेत्रों की संस्कृति, वास्तुकला और लोककला को दुनिया के सामने लाने का श्रेय दिल्ली के बिनोय के बहल को जाता है। उनके कैमरे की नज़र ने लाहौल- स्पीति की बर्फ़ीली घाटियों, प्राचीन मठों और लुप्त होती सभ्यताओं को जीवंत कर दिया। उन्होंने न केवल भारत के बल्कि पूरे एशिया की कला और धरोहर की अनगिनत तस्वीरें खींची हैं।
बिनोय के बहल ने लाहौल-स्पीति की संस्कृति और कला को अपनी डॉक्यूमेंट्री शृंखला ‘स्पेकटाकुलर’ में प्रदर्शित किया। उनकी यह शृंखला दूरदराज़ और दुर्गम क्षेत्रों की अनकही कहानियों को उजागर करती है। लाहौल की ऊंची चोटियों में स्थित छारंग मोनेस्ट्री जैसे अद्भुत बौद्ध स्थलों की तस्वीरें और वीडियो उनके शिल्प कौशल और धैर्य की मिसाल हैं।
योग और बौद्ध परंपराओं का अध्ययन
बिनोय के बहल की डॉक्यूमेंट्री में दिखाया गया है कि कैसे लाहौल- स्पीति के लोग सैकड़ों वर्षों से बर्फ़ और पहाड़ों के बीच अपनी परंपराओं, नृत्यों और धार्मिक अनुष्ठानों को जीवित रखे हुए हैं। उन्होंने इन दृश्यों को बिना किसी हेर-फेर के कैमरे में कैद किया, जिससे उनकी असली सुंदरता और इतिहास सामने आता है।
फोटोग्राफी के साथ- साथ बिनोय के बहल ने लाहौल में योग और बौद्ध परंपराओं का भी अध्ययन किया। उनकी डॉक्यूमेंट्रीज़ में दिखाया गया है कि कैसे इन ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों की जीवन शैली और ध्यान की प्राचीन विधियां आज भी ग्रामीण समुदायों की रोज़मर्रा की जिंदगी का महत्वपूर्ण अंग हैं।
44,000 तस्वीरें 140 से डॉक्यूमेंट्रीज़
बिनोय के बहल की लाहौल और अन्य हिमालयी क्षेत्रों की डॉक्यूमेंट्रीज़ न केवल भारत में, बल्कि विश्वभर में कला और संस्कृति प्रेमियों ने देखी, जिससे सारी दुनिया उसके काम की दीवानी हो गई। उनके कार्य ने लाहौल- स्पीति जैसी दूरदराज़ घाटियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नई पहचान दिलाई है।
उन्होंने 44,000 से अधिक ऐतिहासिक और कला संबंधी तस्वीरें खींची हैं और 140 से अधिक डॉक्यूमेंट्रीज़ बनाईं हैं। उन्होंने बौद्ध मठों और कला स्थलों का दस्तावेज़ीकरण किया और लाहौल की बर्फ़ीली घाटियों को कला और संस्कृति के मानचित्र पर जगह दिला दी है। उनके कैमरे ने दिखाया कि दूरदराज़ जगहों में भी इतिहास, कला और आध्यात्मिकता जीवंत हैं।
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Jyoti maurya

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