ब्रिटिश शिमला के मशहूर चित्रकार, रानी विक्टोरिया तक को था जिनके रंगों से प्यार, विलियम सिम्पसन ने 170 साल पहले बनाई थी ‘पूजा इन सतलुज वैली, हिमालय’ पेंटिंग, आज भी महफूज
ब्रिटिश शिमला के मशहूर चित्रकार, रानी विक्टोरिया तक को था जिनके रंगों से प्यार, विलियम सिम्पसन ने 170 साल पहले बनाई थी ‘पूजा इन सतलुज वैली, हिमालय’ पेंटिंग, आज भी महफूज
विनोद भावुक। शिमला
कहते हैं कि अगर किसी जगह की रूह को जानना है, तो उसे किसी कलाकार की आँखों से देखो। 175 साल पहले के ब्रिटिश दौर के शिमला को देखने के लिए हमें कैमरा नहीं, बल्कि विलियम सिम्पसन की तूलिका चाहिए। शिमला के एक ऐसे यूरोपियन चित्रकार जिन्हें ‘प्रिंस ऑफ पिकटोरियल कोर्सपोडेंट’ कहा गया और जिनकी कला की रानी विक्टोरिया तक प्रशंसक थीं।
उन्होंने कैनवास पर शिमला की खूबसूरती को रच डाला। उनकी पेंटिंग्स में उस दौर का शिमला दिखता है, जहां विक्टोरियन बंगले, पहाड़ी देवस्थल और ब्रिटिश अफसरों की जीवनशैली साथ-साथ बसी थी। ‘पूजा इन सतलुज वैली, हिमालय’ उनकी एक प्रसिद्ध पेंटिंग है, जो शिमला और किन्नौर के आस-पास के मंदिरों और देवी उपासना का जीवंत चित्रण करती है।

सबसे मशहूर ‘वार आर्टिस्ट’
सन 1823 में स्कॉटलैंड में जन्मे सिम्पसन की कहानी बेहद फिल्मी है। वे गरीबी से उठकर ब्रिटेन के सबसे प्रसिद्ध ‘वार आर्टिस्ट’ बने। उन्होंने दुनिया भर में युद्ध, धर्म, संस्कृति और वास्तुकला को अपने ब्रश से जीवंत किया। वह सिर्फ चित्रकार ही नहीं, बल्कि इतिहास के गवाह थे।
1857 के बाद सिम्पसन भारत आए और पंजाब, लाहौर, कश्मीर और पश्चिमी हिमालय की वादियों में घूमे। ब्रिटिश शिमला उनका एक लंबा पड़ाव रहा, जिस दौरान उन्होंने यहां के लोक जीवन को रंगों में रचने का काम किया।

पेंटिंग से समाचार बनाने का हुनर
विलियम सिम्पसन को ‘प्रिंस ऑफ पिकटोरियल कोर्सपोडेंट’ कहा गया, क्योंकि वे पेंटिंग से समाचार बताते थे। विलियम सिम्पसन ने 1860 के दशक में ‘इंडिया एसीएंट एंड मॉडर्न’ और बाद में ‘मीटिंग द सन- ए जर्नी अराउंड द वर्ल्ड’ जैसी मशहूर किताबें लिखीं।
उनके बनाए कई चित्र आज भी ब्रिटिश म्यूजियम और ग्लासगो आर्ट गेलरी में सुरक्षित हैं। अगर आज आप शिमला के पहाड़ों पर कहीं रुककर सोचें तो उन धुंधले रंगों में शायद विलियम सिम्पसन की ब्रश की छाप अब भी मौजूद है।

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