केक और चॉकलेट का स्वाद लेने लंदन से शिमला आती थीं ब्रिटेन की गोरियां, इटैलियन शेफ फेडरिको पेलिटी के हुनर का कमाल
केक और चॉकलेट का स्वाद लेने लंदन से शिमला आती थीं ब्रिटेन की गोरियां, इटैलियन शेफ फेडरिको पेलिटी के हुनर का कमाल
विनोद भावुक। शिमला
शिमला की ठंडी वादियों में एक ऐसा भी दौर रहा है, जब इटली के शेफ फेडरिको पेलिटी के बनाए केक और चॉकलेट का स्वाद लेने के लिए ब्रिटिश महिलाएं गर्मियों में लंदन से शिमला तक का सफ़र करती थीं। पेलिटीज़ ग्रैंड होटल उनकी पहचान बना। ब्रिटिश राज के समय शिमला का यह होटल ठहरने के साथ स्वाद, संगीत, नृत्य और सामाजिक जीवन का केंद्र था।
उस दौर के लेखक रुडयार्ड किपलिंग ने शिमला की सोशल लाइफ को लेकर लिखे आलेखों और पत्रों में फेडरिको पेलिटी के हाथों बनाए जाने वाले केक और चॉकलेट का जिक्र किया करते हुये उनकी दिवानगी का जिक्र किया है। इम्न्पीरियल गेजेट ऑफ इंडिया- शिमला ( कोलोनियल होटेल्स एंड सोशल लाइफ) में पेलिटीज़ ग्रैंड होटल की शोहरत के कई किस्से पढे जा सकते हैं।
वायसराय के शेफ से ग्रैंड होटल तक
साल 1892 में इटैलियन शेफ शेवलियर फेडरिको पेलिटी ने शिमला में पेलिटीज़ ग्रैंड होटल की नींव रखी। इससे पहले वे वायसराय के निजी शेफ रह चुके थे। उन्होंने शिमला में ऐसा ठिकाना बनाया, जहां यूरोपियन खानपान, बॉल पार्टियां और सांस्कृतिक आयोजन ब्रिटिश समाज की पहचान बन गए। यह होटल बड़े- बड़े आयोजनों को लेकर सुर्खियां बटोरने लगा।
बेशक उस दौर में सोशल मीडिया नाम की कोई चीज नहीं थी, फिर भी उस समय ‘Lunch @ Peliti’s’ लिखना उच्च सामाजिक दर्जे का प्रतीक माना जाता था। 1922 में लगी भीषण आग ने इस शाही होटल को राख में बदल दिया, लेकिन स्थानीय कारीगरों ने इसे फिर से खड़ा कर दिया। पेलिटी का नाम दोबारा चमका और होटल ने ब्रिटिश कुलीन वर्ग में अपना सांस्कृतिक महत्व बनाए रखा।
शेफ जो था फोटोग्राफर
कम लोग जानते हैं कि पेलिटी एक उत्कृष्ट फोटोग्राफर भी थे और उनके कैमरे में ब्रिटिश शिमला कैद हुआ। टॉप हैट पहने अफ़सर, बॉल ड्रेस में टहलती ब्रिटिश महिलाएं, पहाड़ियों पर चाय की महफ़िलें। उनकी खींची ये तस्वीरें आज ब्रिटिश म्यूज़ियम्स और आर्काइव्स में सुरक्षित हैं और औपनिवेशिक भारत के दृश्य इतिहास का अहम हिस्सा मानी जाती हैं। ब्रिटिश लाइब्रेरी एंड ब्रिटिश म्यूजियम में फेडरिको पेलिटी के खींचे फोटो संरक्षित किए गए हैं।
पेलिटीज़ ग्रैंड होटल उस दौर का कल्चरल सेंटर था, जहां संगीत, थियेटर, नृत्य और राजनीतिक चर्चा हुआ करती थी। कहा जाता है कि प्रिंस ऑफ वेल्स ने भी इस होटल में डिनर अटेंड किया था। भले ही वह होटल अब इतिहास का हिस्सा बन चुका है, लेकिन शिमला की गलियों में आज भी ‘पेलिटी’ नाम सुनते ही घोड़ों की टापें, संगीत, मिठास भरी हवा और औपनिवेशिक शान वाला पुराना दौर जीवंत हो उठता है।
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