शार्लट कैनिंग : ‘कांगड़ा का किला’ जैसी मशहूर पेंटिंग बनाने वाली भारत की सबसे पहली महिला वॉटरकलर पेंटर
शार्लट कैनिंग : ‘कांगड़ा का किला’ जैसी मशहूर पेंटिंग बनाने वाली भारत की सबसे पहली महिला वॉटरकलर पेंटर
विनोद भावुक / धर्मशाला-शिमला
ब्रिटिश कुलीन महिला शार्लट कैनिंग ने कांगड़ा घाटी की कई अद्भुत वॉटरकलर पेंटिंग्स बनाईं, जिनमें सबसे मशहूर पेंटिंग है ‘कांगड़ा का किला’। 1860 बनाई ‘कांगड़ा किला’ पेंटिंग आज भी भारत के ब्रिटिश युगीनकला इतिहास की सबसे सुंदर जलरंग कृति मानी जाती है।
धर्मशाला की पहाड़ियों से प्रभावित होकर उन्होंने इसे ‘जन्नत की खिड़की’ कहा था। यहां उन्होंने ब्रिटिश इंजीनियर ऑफिस और सर अलेक्ज़ेंडर लॉरेंस के बंगले के पास से घाटी के नजारे रेखांकित किए, जिन्हें बाद में ब्रिटिश गजेटियर में उद्धृत किया गया।
रानी विक्टोरिया उनसे नियमित पत्राचार
शार्लट कैनिंग भारत की सबसे पहली महिला वॉटरकलर पेंटर मानी जाती हैं। उनकी 350 से अधिक पेंटिंग्स लंदन के विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूज़ियम में सुरक्षित हैं। वह भारत की पहली वायसरायन थी, जो रईसी के साथ रंगों, रेखाओं और रिश्तों की गहरी समझ रखती थीं।
उन्होंने हिमालय के आँचल में बिखरे लोकजीवन के रंगों को अपनी कूची से अमर कर दिया। रानी विक्टोरिया उनसे नियमित पत्राचार करती थीं; दोनों के बीच भारत के प्राकृतिक सौंदर्य पर सौ से अधिक पत्र दर्ज हैं।
हिमालय की छटा ने चुरा लिया दिल
31 मार्च 1817 को पेरिस में जन्मी शार्लट ब्रिटिश राजदूत सर चार्ल्स स्टुअर्ट की पुत्री थीं। कला, संस्कृति और कूटनीति के माहौल में पली-बढ़ी शार्लट ने फ्रेंच और इंग्लिश दोनों सभ्यताओं का गूढ़ संगम अपनी शख्सियत में समेटा।
उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री जॉर्ज कैनिंग के पुत्र चार्ल्स कैनिंग से विवाह किया, जो बाद में भारत के गवर्नर जनरल और वायसराय बने। 1856 में शार्लट कैनिंग अपने पति के साथ भारत आई और उसका दिल पश्चिमी हिमालय की छटा में रम गया।
शार्लट कैनिंग की याद में लेडिकेनी’
1861 में मलेरिया से ग्रसित होकर शार्लट कैनिंग का निधन कोलकाता में हुआ। पति लॉर्ड कैनिंग ने उन्हें बैरकपुर में गंगा किनारे एक शांत बगीचे में दफनाया। उनकी समाधि आज भी ‘Lady Canning’s Tomb’ के नाम से जानी जाती है।
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