अमृतसर और कांगड़ा के गवर्नर के देसा सिंह मजीठिया, जिनके संरक्षण में कांगड़ा चित्रकला ने भरी नई उड़ान

अमृतसर और कांगड़ा के गवर्नर के देसा सिंह मजीठिया, जिनके संरक्षण में कांगड़ा चित्रकला ने भरी नई उड़ान
अमृतसर और कांगड़ा के गवर्नर के देसा सिंह मजीठिया, जिनके संरक्षण में कांगड़ा चित्रकला ने भरी नई उड़ान
विनोद भावुक। कांगड़ा
देसा सिंह मजीठिया एक बहुआयामी व्यक्तित्व वाले सिख जमींदार, सैन्य जनरल और राजनेता थे। वे कांगड़ा और पंजाब हिल्स के शासक एवं संरक्षक रहे।1768 में जन्मे देसा सिंह ने अपने पिता नौध सिंह के निधन के बाद 1788 में पारिवारिक जागीर संभाली और 1810–1830 के बीच पहाड़ी चित्रकारों के संरक्षण के लिए पहाड़ी कला के विकास में भी योगदान दिया।
पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला की ओर से 2002 में प्रकाशित पुस्तक ‘द इनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ सिखिज़्म, वॉल्यूम 1’ में हसरत, बी. जे. उल्लेख करते हैं कि 1804 में देसा सिंह ने महाराजा रंजीत सिंह की सेना में शामिल होकर 400 सवारों की कमान संभाली। 1809 में उन्होंने कांगड़ा अभियान में भाग लिया और गोरखा सेनाओं को पंजाब हिल्स से बाहर किया।
अमृतसर और कांगड़ा के गवर्नर
देसा सिंह मजीठिया को अमृतसर और कांगड़ा का गवर्नर बनाया गया। कांगड़ा में महाराजा संसार चंद की ओर से नियुक्त वजीर नौरंग की जगह अव देसा सिंह गवर्नर बने। 1813 में देसा सिंह ने गुलेर राज्य के हरिपुर क्षेत्र को अपने प्रशासन में शामिल किया। 1818 में वे मुल्तान अभियान में भी शामिल रहे और सैन्य जनरल और एडमिनिस्ट्रेटिव के रूप में सफल रहे।
2022 में ब्लूम्सबरी पब्लिशिंग से प्रकाशित यास्मीन रोबिना की पुस्तक ‘मुस्लिम अंडर सिख रूल इन द नाइनटियथ सेंचुरी: महाराजा रणजीत एंड रिलीजियस’ के मुताबिक देसा सिंह ने चित्रकला के विकास के लिए अहम कदम उठाए। उनके संरक्षण में कई कलाकारों ने कांगड़ा शैली की पेंटिंग और सिख धर्म पर आधारित कई मशहूर कलाकृतियां बनाई।
चित्रकला की दी नई उड़ान
देसा सिंह ने कला की विरासत को बचाने के साथ पहाड़ की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत किया। देसा सिंह मजीठिया ने न केवल सैन्य और प्रशासनिक कौशल का परिचय दिया, बल्कि पहाड़ी संस्कृति और कला के संरक्षण में भी अग्रणी भूमिका निभाई। वे पहाड़ी कलाकारों के पहले संरक्षक माने जाते हैं।
उनके जीवन में सैन्य प्रशासन और कला का संगम समाज और संस्कृति के लिए एक अमूल्य धरोहर बन गया। उन्होंने साबित किया कि सच्चा नेतृत्व सत्ता, कला, संस्कृति और न्याय के संरक्षण तक फैला होना चाहिए। उनकी मौत के बाद उनके तीन बेटों में से सबसे बड़े बेटे लहना सिंह मजीठिया प्रशासनिक पद पर रहे।
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Jyoti maurya

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